राणा शुगर मिल करीमगंज से जुड़े गन्ना क्रय केंद्र पर एडवांस गन्ना खरीद के साथ ही किसानों के फर्जी सट्टे का भी पर्दाफाश हुआ है। मामले में तौल लिपिक की सेवा समाप्त कर उसके लाइसेंस के निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है। साथ ही किसानों के गलत सट्टों को बंद कर उनके भुगतान पर भी रोक लगाने के साथ ही गन्ना मूल्य की राशि को राजकीय कोष में जमा कराया जाएगा।
डीएम निधि गुप्ता वत्स के निर्देश पर दो दिन पहले डीसीओ ने राणा शुगर मिल करीमगंज से जुड़े गन्ना क्रय केंद्र शहबाजपुर डोर-ए का निरीक्षण किया था। रात के समय हुए निरीक्षण में केंद्र पर तौल होते पकड़ी गई थी। वहीं, तौल लिपिक मौके से भाग गया था। निरीक्षण में केंद्र पर कई अनियमितताएं भी पाई गई थीं। गजरौला-हसनपुर की बोर्ड बैठक में उक्त क्रय केंद्र पर एडवांस गन्ना खरीद की शिकायत पर छापा मारा गया था। साथ ही क्रय केंद्र पर गन्ने से भरे वाहन मौके पर पाए जाने के साथ अनियमित तरीके से गन्ना खरीद होना पाया गया।
निरीक्षण के बाद मिल प्रबंधन ने तौल लिपिक की सेवा समाप्त कर दी। इतना ही नहीं, जांच के दौरान दो किसानों गुरुचरन सिंह व दर्शन सिंह ग्राम सहदुल्लापुर के गलत तरीके से गन्ना सट्टे चलते पाए गए। जिन पर नियम विरुद्ध तरीके से कृषि योग्य भूमि व गन्ना क्षेत्रफल दर्ज किया गया था। इन सट्टों के माध्यम से तौल लिपिक मिलीभगत करके एडवांस गन्ना खरीद कर रहे थे। उन्होंने बताया कि गन्ना पर्यवेक्षक की रिपोर्ट के आधार पर इन सट्टों पर दर्ज कृषि योग्य भूमि कम करा दी गई है। डीसीओ मनोज कुमार ने बताया कि सट्टों को बंद कराने की कार्रवाई के साथ ही उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) नियमावली, 1954 के नियम-46 के अन्तर्गत गन्ना मूल्य भुगतान रोकते हुए भुगतान राशि को राजकीय कोष में जमा कराने की कार्रवाई की जाएगी।