भूजल का स्रोत माने जाने और लोगों की प्यास बुझाने वाले तालाबों का अस्तित्व संकट में हैं। अनुरक्षण कार्य के अभाव में तालाब के किनारे लगाए गए पौधे सूख गए हैं और तलहटी में घास उग आई है। सूखे तालाबों में पानी तक नहीं भरवाया गया है। तालाबों की बदहाली की तस्वीर रामभूड़ का आदर्श तालाब पेश कर रहा है।
हसनपुर ब्लाक क्षेत्र में 2009-10 में आदर्श तालाब योजना के तहत गांव रामपुर भूड़ में भी एक तालाब का आदर्श तालाब के रूप में चयन किया गया था। इसका मनरेगा के तहत तालाब का सुंदरीकरण कराते हुए तालाब के चारों तरफ बेंच बनवाए जाने के साथ ही पौधे भी लगाए गए थे।
अनुरक्षण कार्य के अभाव में रोपे गए पौधे तो नहीं बचाए जा सके, लेकिन तालाब में बड़ी-बड़ी घास जरूर उग आई। इस सूखे तालाब में पानी भरवाने के भी किसी स्तर पर प्रयास नहीं किए गए। यह हालात सिर्फ रामपुर भूड़ के आदर्श की ही न होकर क्षेत्र के अधिकांश तालाबों की है।