किसान ने आधार कार्ड के हिसाब से बहन को बालिग बताया तो सभी धमकाने लगे। इसके बाद इन लोगों ने 50 हजार रुपये बतौर रिश्वत मांगे। किसान ने रकम देने से इन्कार कर दिया तो यह लोग बहन को ले गए। आरोप है कि उक्त लोगों ने बिना बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किए लड़की को वन स्टॉप सेंटर में भेज दिया।
हालांकि, बाद में बाल कल्याण समिति के दखल पर युवती को परिजनों के साथ जाने की छूट मिल गई थी। किसान का कहना है कि पुलिस व किसी अन्य स्तर पर सुनवाई न होने पर अदालत का रुख किया। अब सीजेएम कोर्ट के आदेश से न्याय की उम्मीद जगी है।
मंडप से उठा ली थी दुल्हन, लौट गई थी बरात
किसान परिवार ने बताया कि पांच मार्च को शादी का दिन था। घर में जश्न का माहौल था। बरात आ चुकी थी। नाच-गाना चल रहा था। दुल्हन मंडप में बैठ गई थी। अचानक कुछ लोग आए और दुल्हन को नाबालिग बताते हुए शादी रुकवाने लगे। दुल्हन के भाई व उसके परिजनों ने आधार में दर्ज उम्र से बालिग बताकर विरोध किया तो उक्त लोगों ने धमकी दी। शर्त रखी कि शादी करानी है तो 50 हजार रुपये दो। रुपये देने से मना किया तो उक्त लोग दुल्हन को लेकर चले गए। इसके कुछ देर बाद ही बरात भी लौट गई थी।
मंडप से लाने के दूसरे दिन बाल कल्याण समिति में पेश की गई थी
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष अतुलेश भारद्वाज ने बताया कि टीम जिस समय लड़की को लेकर पहुंची थी तब तक कार्यालय बंद हो गया था। इसके बाद टीम ने अगले दिन लड़की को समिति के सामने पेश किया। परिजनों द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों के आधार पर युवती को उनके सुपुर्द कर दिया गया था।