जिला अस्पताल की ब्लड बैंक में ए निगेटिव-पॉजिटिव और एबी पॉजिटिव रक्त की उपलब्धता शून्य है। जरूरत होने पर फोन कॉल कर डोनरों से रक्त की पूर्ति की जा रही है। वैसे तो ए निगेटिव-पॉजिटिव व एबी निगेटिव की जरूरत कम पड़ती है, लेकिन गर्मियों में इन ब्लड ग्रुप की अधिक मांग होती है।
कई बार हादसों में घायल मरीजों को ब्लड नहीं होने की स्थिति में परेशानी उठानी होती है। तीमारदार निजी ब्लड बैंक से महंगे दामों में खून खरीदने को मजबूर है। उधर, ओ निगेटिव और एबी निगेटिव ब्लड भी सिर्फ एक-एक यूनिट ही बचा है। जिला अस्पताल में संचालित ब्लड बैंक की क्षमता 350 यूनिट रक्त संग्रहीत करने की है, लेकिन औसतन 150 यूनिट रक्त रखा जाता है। हालांकि, वर्तमान में जिला अस्पताल की ब्लड यूनिट में सिर्फ 33 यूनिट ही रक्त मौजूद है। इसमें भी ए निगेटिव-पॉजिटिव और एबी पॉजिटिव ग्रुप का रक्त नहीं है। वहीं, ओ निगेटिव और एबी निगेटिव ब्लड भी सिर्फ एक-एक यूनिट बचा है।
ब्लड बैंक में रक्त की स्थिति
ए-पॉजिटिव00
ए निगेटिव-00
बी-पॉजिटिव-11
बी-निगेटिव -05
ओ-पॉजिटिव-15
ओ निगेटिव-01
ए-बी पॉजिटिव-00
ए-बी निगेटिव-01
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इन बीमारियों में पड़ती है ब्लड की जरूरत
एनीमिया, प्रसव के पूर्व, प्रसव के उपरांत डिलीवरी के बाद, मेजर सड़क दुर्घटना में रक्त रिसाव होने पर, थैलेसिमिया, ऑपरेशन, कैंसर, किडनी फेल्योर के मरीजों को अक्सर खून की जरूरत पड़ी है।
इस समय ब्लड बैंक में ए निगेटिव-पॉजिटिव और एबी पॉजिटिव रक्त की कमी है। ओ निगेटिव और एबी निगेटिव ब्लड भी सिर्फ एक-एक यूनिट बचा है। जरूरत पड़ने पर फोन कॉल करके डोनरों से रक्त की पूर्ति की जा रही है। जल्द ही सामाजिक संस्था के साथ मिलकर रक्तान शिविर लगवाया जाएगा। जिससे ब्लड बैंक में खून की भरपूर व्यवस्था हो सके।-प्रमोद कुमार, प्रभारी, ब्लड बैंक जिला अस्पताल