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Amroha News: पिता लाचार और सिस्टम बेदर्द... कम होने की बजाय बढ़ने लगा मासूम का दर्द

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अमरोहा। पिता की लाचारी और बेदर्द सिस्टम की वजह से कुत्तों के हमले में गंभीर रूप से घायल दो साल के मासूम गवनीश की हालत सुधरने की बजाय लगातार बिगड़ती जा रही है। मंगलवार को मासूम को जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। परिजनों को आरोप है कि जिला अस्पताल में सरकारी पर्चे पर बाहर से महंगी दवाईयां मंगाई गईं। आर्थिक तंगी से जूझ रहे मनोज महंगी दवाओं का खर्च नहीं उठा सके और मजबूरी में बच्चों को अस्पताल से घर ले गए। अब मासूम घर पर जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। पिता ने प्रशासन और समाजसेवियों से मदद की गुहार लगाई है।
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पतेई खालसा में शुक्रवार रात आवारा कुत्तों के झुंड के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए गवनीश की हालत उपचार के बाद भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है। हमले में कुत्तों ने मासूम का आधा कान तक नोच लिया था। उपचार के दौरान लगाए गए टांकों में पस पड़ने के बाद उसकी हालत दोबारा बिगड़ गई। इसके चलते परिजन उसे मंगलवार सुबह जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे।
मनोज के मुताबिक, जिला अस्पताल में बच्चे को भर्ती कर उपचार शुरू किया गया, लेकिन उपचार के दौरान कुछ दवाएं बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए लिखी गईं। परिजनों का आरोप है कि दवाएं महंगी होने के कारण आर्थिक स्थिति कमजोर होने पर दवाईयां नहीं खरीद सके। डॉक्टरों से मिन्नतें कीं, लेकिन किसी ने उनकी मजबूरी नहीं सुनी। आखिरकार परिजन अस्पताल से छुट्टी कराकर बच्चे को घर ले गए हैं। अब उन्होंने बच्चे के बेहतर इलाज के लिए मदद की अपील की है।
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मेरठ से दिल्ली किया था रेफर
पहले गवनीश को गंभीर हालत में जिला अस्पताल से टीएमयू पाकबड़ा और वहां से मेरठ रेफर किया गया था। मेरठ में उपचार के बाद हालत में कुछ सुधार होने पर चिकित्सकों ने उसे छुट्टी दे दी थी। साथ ही आगे के उपचार के लिए दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाने की बात कही थी लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पिता दिल्ली में इलाज कराने में असमर्थता जता रहे हैं।

बरामदे में सो रहे बच्चे को कुत्ते खींच ले गए थे
कल्याणपुर निवासी मनोज की पत्नी कुसुम सैनी अपने दो बच्चों के साथ तीज के लिए मायके पतेई खालसा आई थीं। शुक्रवार रात करीब 11:30 बजे उन्होंने अपने दो वर्षीय बेटे गवनीश को घर के बरामदे में सुलाया था। कुछ देर बाद लौटने पर बच्चा वहां नहीं मिला। तलाश के दौरान एक ग्रामीण महिला ने बताया कि कुत्तों का झुंड बच्चे को खींचकर ले जा रहा है। परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो कुत्ते मासूम को नोच रहे थे। ग्रामीणों ने किसी तरह कुत्तों को भगाकर बच्चे की जान बचाई। गंभीर हालत में उसे जिला अस्पताल ले जाया गया था, जहां से टीएमयू पाकबड़ा और फिर मेरठ रेफर किया गया था। अब इलाज के खर्च ने परिवार की मुश्किल और बढ़ा दी है।
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जिला अस्पताल में इलाज फ्री में होता है। कुत्ते काटे के इंजेक्शन भी लगाए जाते हैं। सभी तरह की दवाओं की व्यवस्था अस्पताल से ही की जाती है। सभी चिकित्सकों को निर्देश दे रखे हैं कि बाहर की कोई दवा न लिखें। फिर कोई शिकायत आती है, तो उसे दिखवाया जाएगा। -डॉ. एके भंडारी, सीएमएस
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