तिगरी गंगा मेले में आस्था के विविध रूप देखने को मिल रहे हैं तो दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं के बीच सांस्कृतिक विविधता की झलक भी है। इस विविधता के बीच आकर्षण का केंद्र बना है पंजाब से आया निहंगों का जत्था। पचास सदस्यों के इस जत्थे के साथ 22 घोड़ों का समूह भी है। जब घोड़ों के साथ यह जत्था मेला परिसर में निकलता है तो हर किसी की निगाह इन पर थम जाती है।
जत्थे के मुख्य ग्रंथी शमशेर सिंह ने बताया कि इस जत्थे को शिरोमणि पंत अकाली बुड्ढा दल चलदा वहीर चक्रवर्ती पंजाब 96 करोड़ के नाम से जाना जाता है। यहां पर करोड़ का अर्थ उपाधि है। उन्होंने बताया कि जिस मेले में गुरु का प्रकाश पर्व मनाया जाता है। जहां सनातन धर्म से जुड़े मेले लगते हैं, वहां पर पूरा जत्था लाव लश्कर के साथ जाता है। उनका जत्था आठ नवंबर को तिगरी गंगा मेले में पहुंच गया था। इसके लिए 20 से अधिक तंबू लगाए गए हैं। मेले में ही गुरु नानक देव का प्रकाश पर्व मनाया जाएगा। यह जत्था 16 नवंबर तक मेला परिसर में रहेगा। इसके बाद रवाना हो जाएंगे। (संवाद)
प्रतिदिन गंगा स्नान और गुरुवाणी का पाठ
मुख्य ग्रंथी ने बताया कि जत्थे के सभी सदस्य प्रतिदिन सुबह गंगा स्नान करते हैं। साथ ही गुरुवाणी का पाठ किया जाता है। मेला परिसर में ही गुरुद्वारे में श्रद्धाभाव से सभी जुटते हैं। लंगर का आयोजन होता है।
शेर-ए-पंजाब भी है घोड़े का नाम
इस जत्थे के साथ आए घोड़ों की अपनी-अपनी खूबियां हैं। मुख्य ग्रंथी ने बताया कि एक घोड़ा विशेष है, जिसका नाम शेर-ए-पंजाब है। गुरु गोविंद सिंह के नाम का घोड़ा होने के कारण इस पर कोई सवारी नहीं करता।