गजरौला। विजयदशमी पर इस बार रावण का 35, कुंभकर्ण का 30 और मेघनाद का 25 फीट ऊंचा पुतला जलेगा। मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर निवासी रियाजुद्दीन बेटे और पौत्र के साथ 20 दिन से पुतले तैयार करने में लगे हैं। हालांकि, पुतलों को बंदरों ने काफी नुकसान पहुंचा दिया था जिन्हें दोबारा सही करना पड़ रहा है।
अवंतिका पार्क में चल रहा रामलीला महोत्सव दशहरा पर संपन्न हो जाएगा। इस दिन बुराई के प्रतीक रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले दहन किए जाएंगे। रामलीला प्रबंध समिति ने तीनों के पुतले बनाने का जिम्मा मुजफ्फरनगर के रियाजुद्दीन को सौंपा। वह परिवार के साथ 20 दिन से अवंतिका धर्मशाला में पुतला बनाने का काम कर रहे हैं। उनके साथ बेटा मोहम्मद सरताज, भतीजा नावेद और पौत्र आजम भी काम कर रहे हैं।
रावण के 35 फीट ऊंचे पुतले में नीचे का घाघरा आठ फीट चौड़ा होगा जबकि छह-छह फिट के पैर व हाथ बनाए जाएंगे। धड़ की ऊंचाई 20 फीट रहेगी। कुंभकर्ण का पुतला 30 फीट और घाघरे की चौड़ाई पांच फीट होगी। मेघनाद का पुतला 25 फीट का होगा। रियाजुद्दीन ने बताया कि वह करीब तीन दशक से पुतले बनाने का काम कर रहे हैं। वह अपने पिता मोहम्मद शरीफ के साथ पुतले बनाते थे। उनसे ही उन्होंने यह काम सीखा। वह पंजाब में भी पुतले बनाने जाते हैं। दशहरा पर दहन के लिए पुतले करीब तैयार हो चुके हैं। शनिवार शाम बंदर नुकसान न पहुंचाते तो सोमवार शाम तक तैयार कर प्रबंध समिति काे दे देते।
पुतला निर्माण में लगती है यह सामग्री
रियाजुद्दीन व उनके बेटे मोहम्मद सरताज का कहना है कि तीनों पुतलों में 16 किलो सुतली, 20 पुरानी धोती, 50 किलो कागज, तीन हजार रुपये का रंगीन कागज लगा है। बांस का इस्तेमाल किया गया है। बांसों की लंबाई 15 से 20 फीट तक होती है।