अमरोहा। Iसफर पीछे की जानिब है कदम आगे है मेरा...मैं बूढ़ा होता जाता हूं जवां होने की खातिर..।I किसी शायर के ये अल्फाज अमरोहा में नौगांवा सादात के गांव मोहम्मादी माफी के रहने वाले किसान रामपाल सिंह पर सटीक बैठते हैं। 60 साल के रामपाल सिंह आज भी देश दुनिया में नाम कमा रहे हैं। रामपाल सिंह मलयेशिया में होने वाली मलेशियन इंटरनेशनल ओपन मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह चैंपियनशिप 16 व 17 सितंबर को मलेशिया में होगी। रामपाल सिंह देश के 35 मास्टर्स एथलीट के दल में शामिल हैं जो कल यानी बृहस्पतिवार की सुबह मलेशिया के लिए रवाना होंगे।
रामपाल सिंह गांव में रहकर खेती-बाड़ी करते हैं। परिवार में पत्नी कस्तूरी देवी के अलावा तीन बेटे कावेंद्र कुमार, सोमदेव सिंह व दीपक कुमार हैं। कावेंद्र शिक्षक, सोमदेव लिपिक और दीपक सीआइएसएफ में दारोगा हैं। घर पर रामपाल सिंह पत्नी के साथ रहते हैं और बेटे अलग-अलग शहरों में हैं। युवावस्था से ही दौड़ लगाने के शौकीन रामपाल सिंह पूर्व में कई जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर चुके हैं। फरवरी 2022 में लखनऊ में हुई प्रदेश स्तरीय मास्टर्स एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 8 मिनट 30 सेकेंड में 1500 मीटर दौड़ पूरी करके सोना जीता। इसके बाद जुलाई 2022 में बनारस में हुई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया और अपना ही रिकार्ड तोड़ते हुए 6.57 मिनट में 1500 मीटर की दौड़ पूरी कर स्वर्ण पदक जीता। अब देश की राष्ट्रीय मास्टर्स एथलेटिक्स एसोसिएशन ने उनका चयन मलयेशिया के कुआलालंपुर में 16 व 17 सितंबर को होने वाली मलेशियन इंटरनेशनल ओपन मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए हुआ है। जिसके लिए रामपाल सिंह के पास निमंत्रण पहुंच गया है। इस प्रतियोगिता में वह 100 और 1500 मीटर दौड़ लगाएंगे ही। साथ ही तीन किलोमीटर पैदल चाल प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे।
दोस्तों ने कर दिया प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता के लिए आवेदन
रामपाल सिंह के इस शौक को देखते हुए उनके दो मित्र भयंकर सिंह और लाखन सिंह ने फरवरी 2022 में लखनऊ में हुई प्रदेश स्तरीय मास्टर्स एथलेटिक्स प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने के लिए उनका आवेदन कर दिया था। इस बारे में उन्होंने रामपाल सिंह को बताया भी नहीं था। चयन होने के बाद दोनों रामपाल सिंह को लेकर लखनऊ पहुंच गए। लेकिन जब वहां रामपाल सिंह का नाम अनाउंस हुआ तो वह अचंभित रह गए। इस दौरान बिना तैयारी के रामपाल सिंह ने 8 मिनट 30 सेकेंड में 1500 मीटर दौड़ पूरी कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। इसके बाद रामपाल सिंह ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और एक के बाद एक मुकाम हासिल किया।
आम ग्रामीणों की जैसी है रामपाल सिंह की दिनचर्या
किसान रामपाल सिंह बताते हैं कि उनकी दिनचर्या आम ग्रामीणों के जैसी है। वह सुबह 3 बजे उठकर करीब छह किलोमीटर दौड़ने के साथ तेज चाल चलते हैं। इसके बाद वहीं खेतीबाड़ी के कार्य में जुट जाते हैं। रामपाल सिंह ने बताया कि देश के लिए स्वर्ण पदक दिलाऊं ये उनका प्रयास है। इस उम्र में देश के लिए खेलने का सपना पूरा होने वाला है ये मेरे लिए गर्व की बात है।