अमरोहा। बिजनौर को जोड़ने वाले बीलना गांव के रामगंगा पोषक नहर के पुल की हालत खस्ता हो गई है। यह पुल करीब 60 साल पुराना है। पुल को लंबे समय से मरम्मत की दरकार है। पुल के दोनों तरफ के जर्जर पिलर गिराऊ हालत में है। हालांकि, पुल की मरम्मत के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग ने प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है। अनुमति मिलते ही जल्द पुल की मरम्मत होगी।
पीडब्ल्यूडी विभाग के आकड़ों के मुताबिक अमरोहा जिले में छोटे-बड़े कुल 41 पुल हैं। इनमें ज्यादातर नहरों पर ही बने हैं। अमरोहा-जोया रोड पर, अमरोहा-अतरासी रोड और गजरौला में बने समेत तीन रेलवे ओवरब्रिज भी शामिल हैं। इनका निर्माण सेतु निगम ने कराया था। सेतु निगम ने बाद में इन्हें पीडब्ल्यूडी को हैंडओवर कर दिया था। इसके अलावा दिल्ली हाईवे पर ब्रजघाट से चौधरपुर तक कुल सात बड़े फ्लाई ओवर भी हैं।
इनका भी शासन के निर्देश पर मेंटेनेंस संबंधी सर्वे किया गया था। पिछले दिनों एनएचएआई व पपीडब्ल्यूडी विभाग के अफसरों ने ओवरब्रिज और पुलों को सर्वे किया था। इस दौरान सभी फ्लाईओवर संतोषजनक मिले हैं जबकि रामगंगा पोषक नहर पर नौगांवा सादात क्षेत्र में बना बीलना पुल वाहनों के भार से जवाब देने लगा है। पुल के निरीक्षण में अफसरों को खामियां मिली हैं। करीब 60 साल पुराना यह पुल नौगांवा सादात कस्बे से करीब एक किमी आगे अमरोहा-बिजनौर रोड पर बीलना गांव में रामगंगा पोषक नहर पर बना है। इस पुलिस से दिनरात हल्के, भारी वाहनों की आवाजाही रहती है।
पुल के दोनों तरफ के जर्जर हाल पिलर में से कई फिलहाल गिराऊ हालत में हैं। पुलों पर आए दिन हो रहे हादसों के बाद शासन के निर्देश पर जिले के पुलों का अफसरों ने निरीक्षण कर रिपोर्ट शासन को भेजी है। एनएचएआई के डीजीएम ललित मोहन तिवारी ने जिले के सभी छोटे-बड़े 41 पुलों में से बीलना पुल को छोड़कर सभी संतोषजनक हालत में हैं।
पीडब्ल्यूडी विभाग के एक्सईएन गौरव रंजन ने बताया कि निरीक्षण में यातायात के लिहाज से सभी पुल दुरुस्त मिले हैं। इनमें बीलना पुल को छोड़कर 50 साल पुराना कोई भी पुल नहीं है। बीलना पुल की मरम्मत कराने के लिए शासन को एस्टिमेट भेजा है। बजट मिलते ही पुल को दुरुस्त कराया जाएगा।
बुलंदशहर को जोड़ने वाले गंगानगर पुल की एप्रोच रोड भी जर्जर
हसनपुर में पुल दुरुस्त, एप्रोच रोड जर्जर तहसील क्षेत्र में बदायूं-बिल्सी-बिजनौर मार्ग पर कालाखेड़ा व मनोटा के पुल तीन वर्ष पूर्व बने हैं। बुलंदशहर को जोड़ने वाले गंगानगर पुल की एप्रोच रोड भी जर्जर है। 2023 की तीन अगस्त को एप्रोच रोड धंस गई थी। इसके चलते करीब 15 दिन तक दोपहिया व भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया था। सवा छह करोड़ से बने पुल में दो साल में ही आई दरार सवा छह करोड़ रुपये की लागत से दो साल पहले ही रामगंगा पोषक नहर पर बने पुल में एक बार फिर से दरार आ गई है। पुल का एक हिस्सा धंसने लगा है। हादसों का खतरा बना है। पुल खादर क्षेत्र के गांव चकनवाला के पास रामगंगा पोषक नहर पर क्षेत्रीय विधायक राजीव तरारा के प्रयासों से बना था। ग्रामीणों के मुताबिक पुल निर्माण में घटिया सामग्री लगाई गई है। इसके साथ ही बारिश के पानी की निकासी की व्यवस्था भी नहीं की गई है। ऐसे में पुल की दीवार के पास पानी भर जाता है।