गजरौला (अमरोहा)। गजरौला में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं को बंधक बनाकर ठगी करने वाले बड़े गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। भारत एसोसिएट के नाम से फर्जी कंपनी बनाकर देश के अलग-अलग राज्यों से बेरोजगार युवकों को बुलाया जाता था। उन्हें पांच किराये के मकानों में छह महीने तक बंधक बनाकर रखा जाता और उनके परिचितों व रिश्तेदारों को फोन कराकर नौकरी का झांसा देकर रकम वसूली जाती। पुलिस ने पांच स्थानों पर एक साथ छापा मारकर 15 बंधकों को मुक्त कराया और गिरोह के नौ सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। बाद में आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है।
एसपी लखन सिंह यादव के निर्देशन में सीओ अंजलि कटारिया के नेतृत्व में गठित पांच टीमों ने बृहस्पतिवार देर रात मोहल्ला विजयनगर, गंगानगर और मानसरोवर कॉलोनी स्थित पांच किराये के मकानों पर एक साथ कार्रवाई की। छापे के दौरान 15 युवक बंधक मिले, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया। मौके से नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
शुक्रवार को पुलिस ऑफिस में एएसपी अखिलेश भदौरिया और सीओ अंजलि कटारिया ने खुलासा करते हुए बताया कि मेरठ निवासी संदीप गिरोह का सरगना है, जबकि किठौर निवासी अरुण शर्मा उसका मुख्य सहयोगी है। दोनों ने वर्ष 2025 में भारत एसोसिएट नाम से फर्जी कंपनी बनाई थी। पहले यह गिरोह मुरादाबाद में सक्रिय रहा और बीते जनवरी में गजरौला आकर पांच मकान किराए पर लेकर अपना नेटवर्क संचालित करने लगा।
आरोपी सोशल मीडिया और इंटरनेट मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर नेटवर्क मार्केटिंग में नौकरी का विज्ञापन देकर युवाओं को इंटरव्यू के बहाने गजरौला बुलाते थे। यहां पहुंचने के बाद उन्हें बंधक बना लिया जाता था। इसके बाद उन्हें डराकर उनके परिचितों और रिश्तेदारों को फोन कराया जाता था तथा नौकरी दिलाने का लालच देकर 15 से 30 हजार रुपये तक रजिस्ट्रेशन शुल्क के नाम पर वसूले जाते थे।
इस पूरे रैकेट का खुलासा तब हुआ, जब 17 और 18 जुलाई को 18 युवक गार्ड को कमरे में बंद कर वहां से भाग निकले। इनमें मूंढापांडे के सिरसखेड़ा निवासी सचिन भी शामिल था। सचिन ने बुधवार शाम सीओ अंजलि कटारिया से मिलकर पूरे गिरोह की जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की। छापे के दौरान पुलिस ने सात मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 20 फर्जी स्टांप, आवेदन पत्र, तीन रजिस्टर, दो डायरी और 39500 रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस फरार सरगना समेत अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।
-
ऐसे चलता था ठगी का पूरा खेल
सोशल मीडिया पर नौकरी के विज्ञापन जारी किए जाते थे।
इंटरव्यू के नाम पर युवाओं को गजरौला बुलाया जाता था।
पहुंचते ही उन्हें पांच किराए के मकानों में बंधक बना दिया जाता था।
बाहर निकलने पर पूरी तरह रोक रहती थी।
पीड़ितों से उनके रिश्तेदारों को फोन कराकर नौकरी का झांसा दिलवाया जाता था।
रजिस्ट्रेशन और ज्वाइनिंग के नाम पर 15 से 30 हजार रुपये तक वसूले जाते थे।
-
ये आरोपी हुए गिरफ्तार
मेरठ के केपी थाना क्षेत्र के मलियाना फाटक किशनपुर निवासी अनुज
मेरठ के किठौर थानाक्षेत्र के गोविंदपुर निवासी अरुण शर्मा
मुजफ्फरनगर के बुढाना थानाक्षेत्र के भारत पैलेस के पास निवासी फहीम
बरेली के मीरागंज थानाक्षेत्र के करनपुर निवासी चंद्रपाल
बरेली के शाही थानाक्षेत्र के खानपुर निवासी रूपेंद्र कुमार
बस्ती जिले के मझकिरिया निवासी अजीत चौधरी
उत्तराखंड के उधम सिंह नगर थानाक्षेत्र के सितारगंज रामलीला मैदान के सामने निवासी राजेंद्र सिंह
उत्तराखंड के रुद्रपुर थानाक्षेत्र के मोहल्ला दुधिया नगर निवासी अभिषेक कुमार
रामपुर जिले के मिलक थानाक्षेत्र के गांव लखीमपुर निवासी रोहित सिंह
पांच जिलों और उत्तराखंड के युवकों ने चला रखा था ठगी का नेटवर्क
गजरौला पुलिस की कार्रवाई में गिरफ्तार आरोपियों में मेरठ, मुजफ्फरनगर, बरेली, रामपुर और उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर के आरोपी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार यह गिरोह अलग-अलग राज्यों और जिलों से बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर गजरौला बुलाता था। गिरोह का नेटवर्क कई जिलों तक फैला हुआ था और सभी आरोपी मिलकर फर्जी कंपनी के जरिए ठगी के इस संगठित रैकेट का संचालन कर रहे थे।