वर्ष 2011 में शहर के चर्चित डबल मर्डर कांड में विशेष एवं सत्र न्यायाधीश/स्पेशल जज बीडी भारती ने 22 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। 21-21 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। इनमें से पांच लोगों को आर्म्स एक्ट में दो साल की कैद व एक-एक हजार रुपए जुर्माना अदा करने का हुक्म दिया है।
सजा सुनाने के बाद पुलिस ने सभी दोषियों को कस्टडी में लेते हुए मुरादाबाद जेल भेज दिया है। इस केस से संबंधित जानलेवा हमले के अन्य मामले में अदालत ने पांच दोषियों को दस-दस साल के कठोर कारावास व 8-8 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद दोषियों व उनके परिजनों की आंख से आंसू टपक रहे थे।
शुक्रवार की सुबह से ही कचहरी परिसर में कड़ी सुरक्षा बढ़ा दी गई। जैसे ही पुलिस की गाड़ी डबल मर्डर के दोषियों व जानलेवा हमले के दोषियों को लेकर कचहरी परिसर पहुंची वैसे ही लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। दोपहर बाद दोहरे हत्याकांड के दोषियों को कड़ी सुरक्षा में लेकर पुलिस स्पेशल जज की कोर्ट में गई। यहां न्यायाधीश ने सजा पर फैसला सुनाया।
दोहरे हत्याकांड में नामजद सलीम, तहसीन, तस्लीम पुत्रगण यासीन कबाड़ी, शनि, शौकीन, मुकीन, यासीन पुत्रगण अब्दुल रफीक, सरफराज, कमरू पुत्र मेहराज, मेहराब, सिराज पुत्रगण पीरबख्श, इसरार पुत्र अच्छन, निसार, असलम, अहसान पुत्रगण अच्छन, मिस्बाहउद्दीन उर्फ गुड् डू राजा पुत्र पीरबख्श, मुस्कीम पुत्र अब्दुल रफीक, फैसल पुत्र मुस्कीम, सरदार पुत्र अब्दुलरहमान, शाकिर व शाहिद पुत्रगण हसन, इस्लाम पुत्र रहमान को आजीवन कारावास व 21-21 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इसी मसले में पुलिस ने पांच लोगों से आला कत्ल बरामद दिखाया था, जिसमें मिस्बाहउद्दीन, शनि, तसलीम, मेहराब, सरफराज शामिल थे। न्यायाधीश ने उनको आर्म्स एक्ट के तहत दो साल कैद व एक-एक हजार रुपए जुर्माने की सजा दी है।
उधर इसी मुकदमे से संबंधित जानलेवा हमले के एक अन्य मामले में स्पेशल जज ने पांच दोषियों आफताब पुत्र जुल्फिकार, मुन्ना उर्फ करीम पुत्र गफ्फार व जुल्फिकार पुत्रगण भूरा, इरशाद पुत्र करीम को दस-दस साल के कठोर कारावास व आठ-आठ हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
एसपीओ आरबी सिंह व अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता बसंत सिंह सैनी ने बताया कि जानलेवा हमले का यह मामला हत्या में नामजद आरोपी सलीम की तहरीर पर उपरोक्त के खिलाफ दर्ज कराया गया था। फैसला सुनाने से लेकर जेल भेजने तक उनकी सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रही।