बगद नदी के रास्ते गंगा में पहुंच रहा जहरीला केमिकल
बदायूं के कछला घाट के पास गंगा नदी में जाकर मिल रही बगद नदी
अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला।
औद्योगिक नगरी गजरौला में स्थित जुबिलेंट लाइफ साइंसेज, टेवा एपीआई समेत 13 औद्योगिक इकाइयों को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा अप्रैल माह में बंद करने के आदेश दिया था। लेकिन कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने प्रदुषण भी बंद नहीं किया। अब ताजा आदेश के बाद प्रशासन उन पर कितनी सख्ती करता है ये देखने वाली बात है। गजरौला की बड़ी इकाइयों से निकलने वाला प्रदूषित पानी बगद नदी में छोड़ा जाता तो बदायूं में जाकर गंगा से मिलती है। देखना है कि प्रशासन इन इकाइयों पर शिकंजा कसने में कितना सख्ती दिखाता है।
औद्योगिक नगरी गजरौला में नेशनल हाइवे-24 पर जुबिलेंट लाइफ साइंसेज कंपनी से बगल से होकर जा रही बगद नदी और उसके आसपास के भूजल स्तर को जहरीला हुए एक अरसा हो गया। आलम ये है कि बगद से सटे गांव के हैंडपंप और खेतों पर लगे ट्यूबवेल भी जहरीला पीला और लाल पानी उगलते हैं। बता दें कि वर्ष 2016 के अप्रैल माह में बगद नदी से सटे 42 गांव के युवाओं की एक टीम ने जुबिलेंट कंपनी समेत औद्योगिक इकाइयों से होने वाले जल प्रदूषण के खिलाफ मुहिम छेड़ी थी। बगद नदी समेत नदी से सटे गांव और खेतों का भ्रमण कर ट्यूबवेल और हैंडपंपों के पानी के सैंपल लिए थे। ये सैंपल दिल्ली की एक लेबोरेट्री में जांच के लिए भेजे थे। साथ ही मौके पर ही टोटल डिजाल्व सॉल्वेंट मीटर (टीडीएस मीटर) से नदी के पानी समेत हैंडपंपों के पानी की गुणवत्ता की जांच भी की थी। टीडीएस मीटर से टीडीएस और पीएच वैल्यू चेक की थी। टीडीएस मीटर में आई रीडिंग से पानी पीने योग्य नहीं होने की बात सामने आई थी। बगद नदी से आसपास के करीब चालीस गांवों के लोग जहरीला पानी पी रहे हैं। इतना ही नहीं बदायूं के कछला घाट के पास पहुंचकर बगद नदी गंगा में मिल रही है। जहरीला केमिकल गंगा नदी में मिलकर उसे प्रदूषित करता है। यानी गजरौला के सभी छोटी बड़ी औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला जहरीला केमिकल गंगा में मिल रहा है। एनजीटी के नए आदेश के बाद इन इकाइयों पर शिकंजा कसा जाएगा या नहीं ये देखना है।