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रामनगरी में अमित शाह के जरिए होगा नमो-नमो

Wed, 03 Jul 2013 12:26 AM IST
धीरेंद्र सिंह
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नरेंद्र मोदी अयोध्या में अपने सिपहसालार अमित शाह के जरिए 6 जुलाई को मंदिर निर्माण आंदोलन व हिंदुत्व का संदेश देंगे। इसकी पूरी कार्ययोजना विहिप और धर्माचार्यों समेत आयोजन में लगे भाजपा नेताओं तक पहुंच गई है।
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वे रामलला के दर्शन से लेकर 84 कोसी परिक्रमा के जरिए हिन्दू मतों के ध्रुवीकरण की विहिप की रणनीति को भी साझा करेंगे। यह सब होगा अवध क्षेत्र की बैठक के बाद देर रात तक।

भाजपा ने अयोध्या में कारसेवापुरम् यानि विहिप की राजधानी को 6 जुलाई को खास इसी मकसद से बैठक के लिए चुना है। वैसे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को रामलला से आशीर्वाद लेकर देश में चुनावी अभियान का श्रीगणेश करने की सलाह यहां अमृत महोत्सव में आए विहिप के शीर्ष नेताओं, योगगुरु रामदेव समेत तमाम प्रमुख धर्माचार्य दे चुके हैं।
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विहिप के अतंर्राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया ने तो ऐसा नहीं करने पर हिंदुओं के कोपभाजन तक की चेतावनी दे डाली थी। हालांकि बाद में संरक्षक अशोक सिंघल की सलाह पर वे मान भी गए।

इसके बाद बारी भाजपा की तरफ से पहल की थी, जिसे पूरा करने प्रदेश प्रभारी अमित शाह 14 जिलों के पदाधिकारियों के साथ बैठक के बाद शिद्दत से डटेंगे। उनका पहला उद्देश्य लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विहिप के 84 कोसी परिक्रमा कार्यक्रम से लाभ लेने के लिए उसमें साझीदारी की बताई जा रही है, वे रणनीति में कैसे हाथ बंटाएं, इसका कुछ फार्मूला लेकर आएंगे।

बाकी यहां की संत मंडली, विहिप व संघ के लोग और मंदिर आंदोलन में सक्रिय रहे विनय कटियार, लल्लू सिंह जैसे स्थानीय दिग्गज नेताओं से राय लेकर तय होगा।

कार्ययोजना के मुताबिक अमित शाह बतौर मोदी के दूत कई गोपनीय अभियानों का हिस्सा बनेंगे। सबसे पहले हनुमानगढ़ी और रामलला का दर्शन करने जाएंगे फिर विहिप संरक्षक अशोक सिंघल ने 30 जून तक जिन-जिन संतों के यहां पड़ाव डाले थे, उनमें से कई धर्माचार्यों के यहां आशीर्वाद लेने जाएंगे।
 
वे पहली बार रामनगरी आ रहे हैं, लिहाजा अयोध्या घूमकर मंदिर आंदोलन के निशान देखने के साथ ही कारसेवापुरम् में निर्माण की तैयारी का भी जायजा लेंगे। यह भी तय होगा कि नरेंद्र मोदी के आने के लिए अनुकूल समय क्या रहेगा। वे 84 कोसी परिक्रमा की शुरूआत में आएं, या समापन पर। अमित शाह आयोजनों के खर्चे पर भी निगाह रखेंगे।
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