गौरीगंज (अमेठी)। गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले अनुसूचित जाति के बेरोजगार युवक व युवतियों के आर्थिक उत्थान के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्वरोजगार योजना के तहत ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। शासन ने इस योजना के तहत चयनित आवेदकों को प्रशिक्षण के साथ दो से 15 लाख रुपये तक का ऋण देने का प्रावधान किया है।
अनुसूचित जाति के बेरोजगार युवक एवं युवतियों के आर्थिक उत्थान के लिए शासन ने उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्वरोजगार योजना के अंतर्गत अपना स्वरोजगार संचालन के लिए ऋण उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। जिला समाज कल्याण अधिकारी विकास ने बताया कि गरीबी रेखा के नीचे निवास करने वाले आवेदकों को योजना के तहत स्वरोजगार के लिए न्यूनतम दो लाख तथा अधिकतम 15 लाख रुपये परियोजना लागत के अनुसार कृषि एवं अकृषि क्षेत्र की परियोजनाओं में बैंकों के सहयोग से ऋण प्रदान किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत दस हजार शासकीय अनुदान एवं परियोजना लागत की 25 फीसदी मार्जिन मनी ऋण पर चार फीसदी वार्षिक ब्याज की दर से राशि निगम द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। नगरीय क्षेत्र में दुकान निर्माण योजना के अंतर्गत अपनी स्वयं की व्यावसायिक एवं विकसित स्थल पर उपलब्ध भूमि पर दुकान निर्माण के लिए 78 हजार रुपये की लागत निर्धारित है।
बताया कि योजना के तहत दस हजार रुपये शासकीय अनुदान तथा 68 हजार की राशि सीधे विभाग द्वारा ब्याज मुक्त ऋण के रूप में लाभार्थी के बैंक खाते में उपलब्ध कराई जाएगी। ब्याज मुक्त ऋण की अदायगी 10 वर्षों में की जाएगी। धोबी समुदाय के अनुसूचित जाति के व्यक्तियों के लिए लांड्री एवं ड्राई क्लीनिंग योजना के अंतर्गत 2.16 एवं एक लाख रुपये निर्धारित है। इस योजना में भी धनराशि सीधे ब्याज मुक्त ऋण के रूप में लाभार्थी को बैंक खाते के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। इसकी अदायगी समान मासिक किस्तों में पांच वर्षों में की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्र में आवेदक की अधिकतम वार्षिक आय 46,080 तथा शहरी क्षेत्र में वार्षिक आय 56,060 रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।