अमेठी सिटी। सफल होने के लिए नंबर नहीं, ज्ञान की जरूरत होती है। अगर ज्ञान है तो वह अपनी मेहनत की बदौलत बेहतर कर अच्छा मुकाम हासिल करेगा। इसलिए कम नंबर आने व फेल होने पर कभी निराश नहीं होना चाहिए। जिला व प्रदेश टॉपर रहने वाले ही नहीं, बल्कि कई अफसरों ने कम अंक मिलने के बाद भी अपनी मेहनत के दम पर सफलता को अपना गुलाम बनाया।
प्रदेश के जौनपुर जिला निवासी ताला स्थित केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य कपिल देव मिश्र ने बताया कि अगर लक्ष्य बनाकर मेहनत की जाए तो सफलता कदम चूमेगी। कम अंक मिलना व फेल होना असफलता की निशानी नहीं है। यूपी बोर्ड से पढ़ाई कर हाईस्कूल में द्वितीय व इंटर में प्रथम तथा इलाहाबाद विवि से स्नातक व परास्नातक में 60 फीसदी से कम अंक पाने वाले आज अपनी मेहनत के बल पर केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य हैं। प्रयागराज में तैयारी कर पहले नवोदय विद्यालय में पीजी शिक्षक हुए। वर्ष 2017 में नवोदय और केंद्रीय विद्यालय में प्राचार्य के पद पर चयन हुआ। आज वह केंद्रीय विद्यालय में प्राचार्य हैं।
लखीमपुर खीरी जनपद के मूल निवासी जिले के अपर जिलाधिकारी अर्पित गुप्ता ने कहा कि बच्चों को कभी कम अंक आने व असफल होने पर निराश नहीं होना चाहिए। लक्ष्य बनाकर तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में दूसरा तथा स्नातक और परास्नातक में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। पूरी शिक्षा सरकारी स्कूल में हुई। प्रयागराज में अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत वर्ष 2015 में पीसीएस बने। आज अमेठी जनपद में एडीएम हैं।
मनोचिकित्सक डॉ. बीवी सिंह ने बताया कि कभी असफलता से निराश नहीं होना चाहिए। जीवन का हर पल चुनौतियों भरा होता है। हमेशा अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने कहा कि जो भी बच्चे परीक्षा में किसी कारण वश अपनी पूरी क्षमता का प्रदर्शन नहीं कर पाए, उन्हें अपनी कमियों को दूर कर आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।