जामों के भीखीपुर गांव में श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु। स्त्रोत : आयोजक
जामों। श्रीमद्भागवत कथा कल्पवृक्ष के समान है। यह केवल कथा नहीं, हिंदुओं का सद्ग्रंथ है, जिसे निर्मल मन और भावपूर्ण होकर पढ़ना आवश्यक है। ये बातें भीखीपुर गांव में श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन रविवार को वृंदावन से आए प्रवाचक संत मुकेश आनंद महाराज ने कहीं।
प्रवाचक ने बताया कि कथा का श्रवण मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। यह जीने-मरने की कला सिखाती है तथा जीवन को सार्थक दिशा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि परमात्मा ने जीवन दिया है, इसे सफल बनाने का मार्ग भजन-कीर्तन और सत्संग है। सत्संग के प्रभाव से जीवन के साथ परिवार भी अपराध और बुराइयों से दूर रहता है।
उन्होंने कहा कि संस्कारवान बालक समाज में सम्मान प्राप्त करते हैं। सत्संग मनुष्य जीवन का आधार है, क्योंकि यह अध्यात्म की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है। मुख्य यजमान सुरेंद्र कुमार सिंह तथा उनकी पत्नी उमा सिंह ने व्यास पीठ की आरती उतारकर कथा का आरंभ किया। इस मौके पर रामबरन सिंह, नीरज कुमार सिंह, अनिल कुमार सिंह, विपिन सिंह, राहुल सिंह आदि मौजूद रहे।