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मतदाताओं के उत्साह ने मजबूत किया लोकतंत्र

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49 : तिलोई : क्षेत्र में मतदान केंद्र पर वोट देने के लिए कतारबद्ध मतदाता। - सवंाद - फोटो : AMETHI
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लोक को तंत्र से जोड़ने वाले चुनावी महापर्व पर क्षेत्र के मतदाता उत्साह व उल्लास से भरे नजर आए। फिर चाहे युवा हों या बुजुर्ग। महिला हों या पुरुष। मतदाताओं में शामिल निशक्त भी सुबह से बूथ पर थे। वे भी सबसे पहले मत देकर अपना फर्ज निभाने को आतुर दिखे। किसी भी बूथ पर कोरोना संक्रमण का कोई खास असर नहीं दिख रहा था। अधिकांश मतदाता बिना मास्क बूथों पर पहुंचे। हालांकि बूथों पर प्रशासन की ओर से मास्क व सैनिटाइजर के अलावा ग्लब्स की व्यवस्था थी। कई वोटर तो इनका प्रयोग करने को भी तैयार नहीं दिखे। कुल मिलाकर मतदान को लेकर मतदाता उत्साह से लबरेज दिखे।
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विधानसभा क्षेत्र अमेठी
कांग्रेस, भाजपा व सपा में कांटे की टक्कर
गौरीगंज (अमेठी)। जिले की सबसे हॉट सीट अमेठी में रविवार को हुए मतदान के साथ ही एक फरवरी से शुरू सियासी रार फिलहाल थम गई है। नतीजे क्या होंगे यह तो 10 मार्च को पता चलेगा लेकिन बुधवार को बूथों पर दिखी मतदाताओं की कतार और उनका मूड यह जताने के लिए काफी रहा कि इस सीट पर कांग्रेस, भाजपा व सपा में कांटे की टक्कर है।
गरिमा सिंह अमेठी की मौजूदा विधायक हैं। इस बार पार्टी ने उन्हें टिकट न देकर पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह (गरिमा सिंह के पति) पर दांव लगाया है। संजय सिंह 1984 व 1985 (दोनों बार कांग्रेस) में इस सीट से विधायक तो 1998 (भाजपा) में अमेठी लोकसभा सीट से सांसद रहे हैं। डॉ. संजय सिंह की दूसरी पत्नी डॉ. अमीता सिंह भी लगातार 10 साल (2002 से 2012) तक विधायक के रूप में अमेठी का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
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इस सीट पर कांग्रेस ने अपने पुराने धुरंधर व बसपा की सरकार में खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के उपाध्यक्ष रहे आशीष शुक्ल को मैदान में उतारा है। सपा ने दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति की पत्नी महराजी के रूप में तुरुप का पत्ता चला है।
बसपा ने भी अपने पुराने नेता शशिकांत की पत्नी रागिनी को उतारकर चुनाव को चतुष्कोणीय बनाने की कोशिश की है। हालांकि रविवार को हुई वोटिंग के दौरान पूरा चुनाव कांग्रेस, भाजपा व सपा के बीच सिमटा नजर आया। शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण क्षेत्र। हर जगह के बूथों पर तीनों दल एक दूसरे को पिछाड़ने के प्रयास में जुटे रहे। अमेठी, भादर, संग्रामपुर व भेटुआ ब्लॉक के कई बूथों पर देर से मतदान शुरू होने, ईवीएम खराब होने, सुरक्षा कर्मियों द्वारा एजेंटों को खदेड़ देने के मामले भी सामने आए। कई बूथों पर वोट डालने पहुंचे लोग मतदाता सूची में नाम नहीं होने से परेशान दिखे।
विधानसभा क्षेत्र-जगदीशपुर
भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशी आमने-सामने
गौरीगंज (अमेठी)। जगदीशपुर जिले का इकलौता सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र है। 1962 में गठित यह सीट कुछ चुनावों को छोड़कर लगातार कांग्रेस के कब्जे में रही है। रविवार को हुई वोटिंग के दौरान मतदाताओं का रुझान देखकर लगा कि इस बार के चुनाव में भी मुख्य मुकाबला इन्हीं दो दलों के बीच है।
कभी कांग्रेस का गढ़ रही यह सीट मौजूदा समय भाजपा के कब्जे में है। प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री सुरेश पासी यहां से विधायक हैं। 2017 के चुनाव में सुरेश ने यह सीट कांग्रेस के राधेश्याम धोबी (2012 से 2017 तक इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले) को लंबे अंतर से हराकर छीनी थी। इस चुनाव में भाजपा ने दोबारा सुरेश पर दांव लगाया है तो कांग्रेस ने 2012 के चुनाव में सपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके विजय पासी को अपना प्रत्याशी बनाया है। विजय पासी अपनी बिरादरी में अच्छी पकड़ रखते हैं। प्रियंका व राहुल की दो रैलियों ने भी उन्हें मजबूत किया है।
सपा ने पहले रचना कोरी को उम्मीदवार बनाया था। रचना की ओर से नामांकन करने के बाद पार्टी ने उनका टिकट काटकर विमलेश सरोज को प्रत्याशी घोषित कर दिया। विमलेश जुझारू हैं और लंबे समय से संघर्षशील रही हैं। बसपा ने पुराने कार्यकर्ता जितेंद्र पासी पर भरोसा जताया है। यहां कांग्रेस व भाजपा में आमने-सामने की टक्कर नजर आई। लोगों का मानना था कि यदि मुस्लिम वोटर सपा के साथ गए तो भाजपा व कांग्रेस के साथ गए तो कांग्रेस इस सीट पर अपना परचम फहरा सकती है। इस विधानसभा क्षेत्र के कई बूथों पर सुबह कुछ घंटे तक मतदान बाधित होने, पार्टियों की ओर से बनाए गए बूथ एजेंटों में कहासुनी होने के मामले सामने आए।
गौरीगंज सीट पर भी त्रिकोणीय संघर्ष
गौरीगंज (अमेठी)। जिला मुख्यालय के विधानसभा क्षेत्र गौरीगंज का प्रतिनिधित्व हासिल करने के लिए सपा व भाजपा के अलावा कांग्रेस ने भी पूरा जोर लगाया है। 27 फरवरी को क्षेत्र में इसका असर भी दिख रहा था। विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए सभी पार्टी कार्यकर्ता मतदाताओं को बूथों तक पहुंचाने की कोशिश में जुटे रहे। बूथों पर कभी भीड़ तो कभी सन्नाटे की तस्वीरें भी सामने आईं।
वर्ष 1967 में गठित गौरीगंज विधानसभा सीट पर रविवार को मौजूदा चुनाव के लिए वोट डाले गए। यह सीट पिछले दो चुनावों से समाजवादी पार्टी के पास है। राकेश प्रताप सिंह यहां के विधायक हैं। 2012 में उन्होंने यह सीट बसपा से छीनी थी। इस चुनाव में कांग्रेस के मो. नईम दूसरे व 2007 से 2012 तक बसपा के विधायक रहे चंद्र प्रकाश मिश्र मटियारी तीसरे नंबर पर रहे थे। 2017 के चुनाव में राकेश ने कांग्रेस के मो. नईम को भारी अंतर से हराया था। राकेश प्रताप सिंह मौजूदा चुनाव में भी सपा प्रत्याशी हैं। भाजपा ने चंद्र प्रकाश मिश्र मटियारी तो कांग्रेस ने फतेह बहादुर पर दांव लगाया है।
बसपा ने पूर्व में जिला पंचायत सदस्य रहे राम लखन शुक्ल को उतारकर मुकाबले को चतुष्कोणीय बनाने की असफल कोशिश की है। रविवार को मतदान के दिन भी सभी पार्टी के प्रत्याशी व उनके समर्थक जीत सुनिश्चित करने के लिए दमखम से जुटे रहे। गौरीगंज विधानसभा पर त्रिकोणीय मुकाबला होने से अलग-अलग बूथों पर सपा, भाजपा व कांग्रेस के बीच टक्कर देखने को मिली। सुबह जहां मतदान की गति तेज रही वहीं दोपहर को कई बूथों पर सन्नाटा भी नजर आया। हालांकि सूर्य अस्त होने से पहले बूथों पर मतदाताओं की भीड़ उमड़ी। मतदान करने के लिए बूथों पर पहुंचने वाले ज्यादातर लोग चुप्पी साधे हुए थे। समर्थकों को छोड़कर जो बोल भी रहे थे वह खुलकर किसी का नाम नहीं ले रहे थे। कई मतदाता यह कहते सुने गए कि यहां के चुनाव परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं।
तिलोई विधानसभा सीट पर सभी की नजर
गौरीगंज (अमेठी)। तिलोई विधानसभा क्षेत्र के चुनावी परिणाम पर पूरे जिले की नजर है। भाजपा प्रत्याशी के एक विवादित बयान के बाद हॉट सीट बन चुकी तिलोई विधानसभा में कांग्रेस व सपा वापसी की कोशिश में जुटी हैं तो भाजपा अपनी सीट बचाने के लिए कड़ा संघर्ष करती दिख रही है। रविवार को जहां बूथों पर उमड़ी मतदाताओं की भीड़ कुछ और ही बयां करने की कोशिश करती दिखाई दी।
तिलोई के रहने वाले मयंकेश्वर शरण सिंह मौजूदा समय यहां के विधायक हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बसपा के मो. सऊद को 44 हजार वोटों के भारी अंतर से हराया था। भाजपा ने इस बार भी मयंकेश्वर को अपना प्रत्याशी बनाया है। सपा ने गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के टिकट पर लगातार तीन चुनाव हार चुके मो. नईम को तो बसपा ने रघुवंश कुमार दुबे को प्रत्याशी बनाकर जातिगत समीकरणों को साधाने की कोशिश की है। कांग्रेस ने चुनाव पूर्व तक पार्टी के जिलाध्यक्ष रहे प्रदीप सिंघल को प्रत्याशी बनाकर भाजपा के साथ सपा का भी गणित गड़बड़ा दिया है।
तिलोई की चुनावी लड़ाई में तीनों दल आमने-सामने हैं। 1993 व 2002 में भाजपा, 2007 में सपा व 2017 में भाजपा से विधायक चुने गए मयंकेश्वर को इस बार अपनी सीट बचाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। आम तौर पर शांत विधानसभा के रूप में अपनी पहचान रखने वाली तिलोई मौजूदा चुनाव में मंयकेश्वर के एक-एक कर कई विवादित बयान के बाद हॉट सीट बन चुकी है। बयान के बाद दोनों समुदाय के लोग चुप्पी साधे बैठे थे। रविवार को यहां के बूथों पर उमड़ी मतदाताओं की भीड़ मतगणना के दिन चौंकाने वाला परिणाम आने की ओर इशारा कर रही थी। रविवार को पार्टी एजेंट एक-एक मतदाता को चिह्नित कर मतदान कराने की कोशिश में दिखे। सुबह कई बूथों पर ईवीएम के खराब होने तथा तकरार के मामले सामने आने के बावजूद मतदाता बूथों पर डटे रहे।

47 : जगदीशपुर : क्षेत्र में मतदान देने के लिए लाइन में लगे मतदाता। - सवंाद- फोटो : AMETHI

46 : अमेठी : शहर स्थित बूथ पर मतदान के लिए कतारबद्ध मतदाता। - सवंाद- फोटो : AMETHI

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