जायस (अमेठी)। सरकारी गेहूं खरीद क्रय केंद्रों पर खरीद की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बावजूद इसके केंद्रों पर किसानों के दर्शन नहीं हुए। वहीं मंडी समिति जायस के व्यापारियों की आढ़तों पर किसानों की भारी भीड़ लगी रही। इसका कारण खुली मंडी में गेहूं का दाम सरकारी दर से अधिक होना है।
एक अप्रैल से सरकार ने किसानों की गेहूं की उपज की खरीद करने के लिए, मंडी समिति जायस परिसर में चार क्रय केंद्र (विपणन शाखा प्रथम, द्वितीय, तृतीय, व एफसीआई) खोले हैं। वहीं बहादुरपुर ब्लॉक क्षेत्र में 06 क्रय केंद्र तथा तिलोई तहसील क्षेत्र में 19 क्रय केंद्र किसानों की सुविधाओं के लिए खोले गए हैं। खरीद के प्रथम दिन मंडी समिति परिसर में बने क्रय केंद्रों पर किसान की उपज की खरीद करने की सारी व्यवस्था दुरुस्त दिखी, लेकिन किसान अपनी उपज बेचने के लिए क्रय केंद्रों पर आते नहीं आए।
वहीं मंडी के व्यापारियों के आढ़तों पर किसानों की भीड़ लगी रही। इसका कारण गेहूं की दरों में बाजार में उछाल होने के कारण व्यापारी सरकारी क्रय केंद्रों से लगभग 15-35 रुपये तक प्रति क्विंटल अधिक रेट में खरीद रहे हैं। सरकार ने किसानों के गेहूं की उपज का मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।
खुले बाजार में गेहूं (पुराना) का रेट 2050 तो नया गेेहूं 2025 रुपये प्रति क्विंटल है। वहीं किसानों को व्यापारियों से अपनी उपज की कीमत नगद मिल जा रही है। और सरकार किसानों का भुगतान पीएसएमएस के माध्यम से करेगी वहीं 20 रुपये प्रति क्विंटल की दर से उनको पल्लेदारी भी देनी होगी। इसी कारण किसान अपनी उपज को कम दाम में सरकारी क्रय केंद्र पर बेचने के बजाए वह अपनी उपज को अधिक दाम में व्यापारियों के पास बेच रहा है।
क्या कहते हैं किसान
बहादुरपुर ग्राम पंचायत के गांव पूरे केशरी निवासी किसान तेजबहादुर सिंह ने बताया कि उन्होंने तीस एकड़ जमीन में गेहूं की फसल तैयार की है। हर बार अपनी उपज सरकारी क्रय केंद्रों पर ही बेचता हूं। इस बार बाजार में गेहूं की कीमत सरकारी खरीद से अधिक मिल रही है तो सरकारी केंद्रों का चक्कर क्यों लगाए। ग्राम पंचायत मवई आलमपुर निवासी किसान रजवाड़ी पासी ने कहा कि सरकारी क्रय केंद्र पर अपनी उपज बेचने के लिए बड़ी मुश्किलें उठानी पड़ती हैं। जब बाहर बाजार में हमें 25 रुपये अधिक मिल रहे हैं तो हम अपनी उपज व्यापारियों को ही क्यों न दें।
व्यवस्था दुरुस्त : ईएमओ
ईएमओ सत्य प्रकाश राय ने बताया कि सभी क्रय केंद्रों पर खरीद की सारी व्यवस्था दुरुस्त कर ली गई है। केंद्र प्रभारियों द्वारा किसानों से फोन पर संपर्क किया जा रहा है कि वह अपनी उपज को सरकारी क्रय केंद्र पर बेचें।