अमेठी। बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव अधिवक्ता उपेंद्र शुक्ल पर लगाए गए कथित सात लाख रुपये के गबन और वित्तीय अनियमितता के आरोपों को लेकर चल रहे विवाद में सोमवार को नया घटनाक्रम सामने आया। तहसील खुलते ही उपेंद्र शुक्ल ने सामान्य सभा बुलाने की मांग के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान शुरू किया। उनका दावा है कि बार एसोसिएशन के 146 सदस्यों में से 86 अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर हो चुके हैं। दूसरी ओर बार एसोसिएशन के सचिव ने कार्रवाई को नियमों के अनुरूप बताया है।
उपेंद्र शुक्ल ने अधिवक्ताओं के बीच अपील पत्र वितरित कर कहा कि बिना नोटिस दिए और पक्ष सुने उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। उनका आरोप है कि जांच समिति की रिपोर्ट न तो कार्यकारिणी के समक्ष रखी गई और न ही सामान्य सभा में प्रस्तुत की गई। ऐसे में सदस्यता समाप्त करने का निर्णय बार एसोसिएशन के संविधान और नियमों के विपरीत है। उन्होंने अधिवक्ताओं से सामान्य सभा बुलाने की मांग का समर्थन करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि यदि सामान्य सभा में उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सिद्ध हो जाते हैं तो वह सात लाख रुपये जमा कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगेंगे। यदि आरोप सिद्ध नहीं होते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ 14 लाख रुपये की मानहानि का दावा करने के साथ वैधानिक कार्रवाई करेंगे। बार एसोसिएशन के सचिव अनिल कुमार तिवारी ने बताया कि सदस्यों की शिकायत पर गठित पांच सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। उसी रिपोर्ट के आधार पर बार एसोसिएशन के नियमों के अनुरूप कार्रवाई की गई है।