गौरीगंज (अमेठी)। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते दो माह से जिले में आरटीपीसीआर जांच बंद चल रही है। अब तक इमरजेंसी मरीजों के करीब 20 से 25 सैंपलों की जांच हो जाती थी। सप्ताह भर से इमरजेंसी जांच भी पूरी तरह से बंद हो गई है। यह स्थिति जांच के दौरान प्रयुक्त होने वाली 79 प्रकार की सामग्री पूरी तरह समाप्त होने से उपजी है। जबकि विभाग की ओर से सामानों की खरीद के लिए नवंबर माह में ही मांग पत्र एमडी एनएचएम को भेजा दिया गया था।
कोरोना काल में लक्षण वाले मरीजों की जांच के लिए जिला अस्पताल भवन में बीती तीन जुलाई से आरटीपीसीआर लैब का संचालन शुरू किया गया था। जिले में लैब का संचालन होने से दूसरे दिन ही जांच रिपोर्ट मिल जाती थी। कोरोना सैंपलों की जांच के दौरान लैब में कुल 79 प्रकार की सामग्री प्रयुक्त की जाती है। जांच सामग्री समाप्त होते देख विभाग की ओर से नवंबर माह में ही सामानों की खरीद के लिए मांग पत्र एमडी एनएचएम को भेज दिया गया था।
बावजूद इसके बजट नहीं आने से खरीद नहीं हो सकी। ऐसे में दो दिसंबर से जिले की लैब में जांच बंद हो गई। एकत्र सैंपल को जांच के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल लखनऊ की लैब में भेजा जाने लगा। यहां पर सिर्फ इमरजेंसी वाले मरीजों की जांच की जा रही थी। पिछले सात दिनों से सामग्री पूरी तरह समाप्त होने के बाद इमरजेंसी जांच भी बंद कर दी गई। अब एक भी सैंपलों की जांच यहां नहीं की जा रही है।
हर रोज एकत्र हो रहे करीब दो हजार सैंपल
आरटीपीसीआर लैब के एलटी वरुण शुक्ल के अनुसार वर्तमान में करीब 1800 से 2000 सैंपल हर रोज जांच के लिए एकत्र हो रहे हैं। सभी सैंपलों को जांच के लिए लखनऊ भेजा जा रहा है। लखनऊ से जंाच रिपोर्ट तीसरे दिन मिल पा रही है। ऐसे में लक्षण वाले मरीजों को जिन्हें कोरोना नहीं है उन्हें भी तीन दिन तक होम आइसोलेशन में रखकर रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ा रहा है।
जल्द शुरू होगी जांच
सीएमओ डॉ. सीमा मेहरा ने बताया कि एमडी एनएचएम की ओर से आरटीपीसीआर लैब में सामानों की खरीद के लिए 20 लाख का बजट मिला है। कहा कि बजट को जिला अस्पताल के एनएचएम खाते में स्थानांतरित किया जा रहा है। इसके बाद जिला अस्पताल द्वारा जांच के लिए आवश्यक सभी सामग्रियों की खरीद कराकर जल्द ही जिले में कोरोना सैंपलों की जांच शुरू करा दी जाएगी।