बाजार शुकुल (अमेठी)। तीन पुरवों के करीब 800 लोगों का रास्ता पिछले 20 दिन से बाधित है। यह स्थिति इन गांवों को जोड़ने वाले एकमात्र खड़ंजा मार्ग के अतिवृष्टि में बह जाने से उत्पन्न हुई है। मार्ग की मरम्मत नहीं होने से लोग या तो घरों में बैठे रहने को विवश हैं या फिर बेहद जरूरी होने पर उन्हें तीन किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
गोमती किनारे बसी उरेरमऊ ग्राम पंचायत की दूरी ब्लॉक मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर है। इस ग्राम पंचायत के अधिकांश लोगों को छोटे बड़े काम के लिए प्रतिदिन ब्लॉक मुख्यालय तक आना जाना रहता है।
20 दिन पहले हुई भीषण बरसात में इस ग्राम पंचायत के तीन पुरवों (मीरमऊ, बखरा पश्चिम और पूरे महीपत) के लोगों को न्यूनतम दूरी तय करके मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए बनाया गया खड़ंजा मार्ग बह गया। लगातार तीन दिन तक चली बरसात के दौरान लोग अपने घरों में कैद रहे।
इसके बाद जब उनके बाहर निकलने की स्थिति आई तो कटा हुआ रास्ता मुसीबत बन गया। तब से लेकर अब तक इन तीनों गांव में रहने वाली 800 से अधिक आबादी को इस मुसीबत से निजात नहीं मिल सकी है। इन गांवों के लोग या तो घर में बैठे रहते हैं या फिर उन्हें तीन किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करके मुख्य मार्ग तक पहुंचना होता है। बरसात समाप्त होने के 20 दिन बाद भी मार्ग सही नहीं कराए जाने से ग्रामीणों में आक्रोश है।
स्कूल नहीं जा पा रहे बच्चे
उरेरमऊ ग्राम पंचायत के इन तीनों पुरवों के बच्चों की पढ़ाई के लिए पूरे महीपत गांव में परिषदीय प्राथमिक स्कूल का संचालन होता है। तीनों गांवों के अधिकांश बच्चे इस स्कूल में पढ़ने जाने के लिए इसी खड़ंजा मार्ग का इस्तेमाल करते हैं।
मार्ग के बह जाने से पढ़ने वाले बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे। मजबूरी में इन्हें घर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। कक्षा चार में पढ़ने वाली सीमा व महेंद्र, कक्षा एक में पढ़ने वाले रामसजीवन तथा कक्षा दो में पढ़ने वाले जसवंत के अभिभावकों ने बताया कि बच्चे 20 दिन से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।
ग्रामीणों ने की थी शिकायत
बरसात बंद होने के बाद ग्रामीणों ने रास्ते को दुुरुस्त करने की मांग सबसे पहले ग्राम पंचायत प्रधान व सचिव से की। सुनवाई नहीं होने पर इसकी मांग बीडीओ से भी की गई। बावजूद इसके अब तक रास्ते को दुरुस्त नहीं कराया गया। इसके चलते ग्रामीणों को परेशानी से निजात नहीं मिल रही।
क्या कहते हैं ग्रामीण
ग्रामीण उदयराम ने बताया कि खड़ंजा मार्ग ही तीनों गांवों को न्यूनतम दूरी तय करके मुख्य मार्ग तक पहुंचाने वाला इकलौता मार्ग है। इसके कट जाने से भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। गुरु प्रसाद निषाद ने कहा कि शिकायत के 20 दिन बाद भी अब तक कोई अधिकारी गांव तक नहीं आया। रामराज ने कहा कि रास्ता बाधित होने के करण सर्वाधिक दिक्कत बच्चों को है। वे स्कूल नहीं जा पा रहे। सुखराम ने कहा कि यदि जल्द ही मार्ग का निर्माण नहीं कराया गया तो ग्रामीण धरना प्रदर्शन करने को विवश होंगे।