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बदहाल सड़कें व चरमराई चिकित्सा व्यवस्था बड़ी चुनौती

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सिंहपुर (अमेठी)। तिलोई विधायक मयंकेश्वर शरण सिंह के योगी मंत्रिमंडल-2.0 में राज्य मंत्री बनने के साथ ही उनकी जिम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं। क्षेत्र की बदहाल सड़कें और चरमराई चिकित्सा व्यवस्था उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
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तिलोई विधानसभा क्षेत्र से पांचवीं बार विधायक बने मयंकेश्वर शरण सिंह को इस बार योगी मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री बनाया गया है। सोमवार को विभाग के बंटवारे में उन्हें चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु कल्याण तथा संसदीय कार्य में राज्यमंत्री की जिम्मेदारी मिली है। चिकित्सा क्षेत्र में तिलोई क्षेत्र को मंत्री से बहुत अपेक्षाएं हैं।
राज्यमंत्री चिकित्सा शिक्षा के तौर पर क्षेत्र के जन मानस की अपेक्षाओं पर बात करें तो लौली गांव के मदनचक निवासी दिलीप पांडेय का कहना है कि विभाग के आवंटन से तिलोई में बनने वाले राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण शीघ्र शुरू हो सकता है। संचालन शुरू होने पर मेडिकल की दुनिया में क्षेत्र के युवाओं को मौका मिलेगा।
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मेडिकल कक्षाओं में प्रवेश पाने के लिए बालक बालिकाओं की पढ़ाई का स्तर ऊपर उठेगा। इसके अलावा अन्य मेडिकल शैक्षिक संस्थाओं को बढ़ावा मिलेगा। एएनएम कोर्स, डी-फार्मा, बी-फार्मा तथा लैब टेक्नीशियन जैसे क्षेत्रों में क्षेत्र के बालक बालिकाएं हाथ आजमाएंगे।
चिकित्सा व्यवस्था को पटरी पर लाना आसान नहीं
तिलोई क्षेत्र में कहने को दो सौ बेड का रेफरल अस्पताल है। अस्पताल में उपकरण भी उपलब्ध हैं। बावजूद इसके चिकित्सकों की भारी कमी के चलते आम जनमानस को कोई फायदा नहीं मिल रहा है। यही नहीं लैब टेक्नीशियन नहीं होने से पैथालॉजिकल सुविधाएं भी आम जनमानस को नहीं मिल रहीं।
तिलोई सीएचसी पर भी मानक के अनुरूप चिकित्सक की तैनाती नहीं है। सिंहपुर सीएचसी का भी बुरा हाल है यहां सिर्फ एक चिकित्सक की तैनाती है। इसके साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इन्हौना, फत्तेपुर, सातन पुरवा, जायस व फुरसतगंज अस्पतालों के हाल अच्छे नहीं है। यहां भी चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मियों की बड़े पैमाने पर कमी है।
बदहाल सड़कों से निजात दिलाना भी चुनौती
क्षेत्र की बदहाल सड़कों से आम जनमानस को निजात दिलाना नए नवेले मंत्री के लिए बड़ी चुनौती है। कई सड़कें काफी दिनों से निर्माणाधीन हैं। काम शुरू करने के बाद ठेकेदार लापता हैं। विभागीय अधिकारियों के पास देखने तक का समय नहीं है। एक मार्ग इन्हौना से मोहनगंज को छोड़ दिया जाए तो कोई ऐसा मार्ग नहीं है जो पूरी तरह से क्षति ग्रस्त नहीं हो। ग्रामीण क्षेत्र के मार्गों की हालत तो बद से बदतर हो गई है।
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