अमेठी सिटी। सरकारी विद्यालयों की बदहाली की तस्वीर बदलनी हो तो कोई पूर्णिमा तिवारी से सीखे। प्राथमिक विद्यालय सारीपुर की प्रधानाध्यापिका ने न केवल जर्जर भवन को आदर्श विद्यालय का रूप दिया, बल्कि बच्चों की उपस्थिति से लेकर नवोदय में चयन और स्मार्ट क्लास की कहानी को हकीकत में बदला है। वह बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए समर्पित हैं।
तीन अक्तूबर 2016 को जब उन्होंने विद्यालय का कार्यभार संभाला, तब यहां की स्थिति ठीक नहीं थे। छत टपकती थी। बारिश में बच्चों को बैठने की जगह नहीं मिलती थी और उपस्थिति बेहद कम रहती थी। पूर्णिमा ने समझौता करने के बजाय हालात बदलने की ठानी। कंपोजिट ग्रांट के माध्यम से विद्यालय भवन का पुनर्निर्माण कराया। फर्श पर टाइल्स और सभी दरवाजे डबल लॉक सिस्टम के लगवाए।
विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए वे प्रतिवर्ष अपनी निजी आय से शैक्षिक शिविर आयोजित करती हैं। शिक्षण को रोचक बनाने के लिए आईसीटी लैब का निर्माण कराया गया है, जहां दो स्मार्ट टीवी, प्रोजेक्टर, कंप्यूटर, प्रिंटर, इन्वर्टर, वाई-फाई और सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। बच्चों को तकनीक से जोड़ने की यह पहल ग्रामीण अंचल में एक अनूठा उदाहरण बन गई है
दो छात्रों का नवोदय में चयन
वर्तमान में विद्यालय में 105 बच्चे नामांकित हैं। बीते तीन वर्षों में यहां से दो बच्चों का चयन नवोदय विद्यालय के लिए हुआ है। विद्यालय को दो बार निपुण विद्यालय सम्मान मिल चुका है। यहां के बच्चे कविता पाठ, चित्रकला और खेलकूद प्रतियोगिताओं में मंडल स्तर तक प्रतिभाग कर चुके हैं। इन प्रतिभाओं को जिले के मंत्री, विधायक, जिलाधिकारी और जनप्रतिनिधियों से कई बार सम्मान मिल चुका है।
बेहतर शिक्षा के लिए कर रहीं काम
पूर्णिमा ने यह साबित किया है कि लगन और दूरदर्शिता हो तो संसाधनों की कमी भी बाधा नहीं बनती। उनकी यह कार्यशैली न केवल अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणा है, बल्कि बच्चों और अभिभावकों में शिक्षा के प्रति भरोसा भी जगा रही है। वह कहती हैं कि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले, इसके लिए पूरी तन्मयता से काम कर रही हैं। स्कूल में बेहतर माहौल हो तो छात्र संख्या अपने आप बढ़ जाएगी।