अमेठी। डीपीआरओ ने न सिर्फ खुद भ्रष्टाचार किया बल्कि ब्लॉकों में घपला करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नही की। रोक के बावजूद कई ब्लॉकों में सरकारी खातों से धन निकाला जाता रहा। जांच में इसकी पुष्टि भी हो गई लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। दिशा की बैठक में आरोप लगने के बाद उनके भ्रष्ट आचरण की परतें खुलने लगी हैं।
अमेठी के गांव पूरे बेलौरा निवासी डॉ. अवधेश कुमार मिश्र ने जिले के 13 विकास खंडों में तकनीकी एवं प्रशासनिक मद के खातों से हुए लेनदेन के बारे में जानकारी मांगी थी। 16 अगस्त को जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय से मिली सूचना में भारी अनियमितता की जानकारी दी गई। कई बार शिकायत के बाद भी जब जांच नहीं हुई। तो अवधेश मिश्र ने हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में जनहित याचिका दाखिल की। कोर्ट की फटकार के बाद जांच अधिकारी बीएसए और एएओ को डीपीआरओ कार्यालय से बमुश्किल अभिलेख मुहैया कराए गए।
बीएसए एवं एएओ ने 11 नवंबर 2022 को जांच की तो ब्लॉक भादर में एक अप्रैल 2017 से 14 अक्टूबर 2020 तक नियम विरुद्ध तरीके से एकल खाते से कुल 8,97,424 रुपये का का लेनदेन हुआ। एडीओ पंचायत ने जो कैसबुक की छाया प्रति दी उसमें किसी के हस्ताक्षर नहीं थे। जो भुगतान किया गया उसमें ना तो प्राप्तकर्ता के हस्ताक्षर थे और ना ही कोटेशन टेंडर वित्तीय नियमों का पालन किया गया। जांच अधिकारियों ने इसके लिए एडीओ पंचायत को उत्तरदायी बताया।
अमेठी में 29 सितंबर 2016 से 20 जून 2020 तक कुल 7,33,651 रुपये का व्यय संयुक्त हस्ताक्षर से एडीओ पंचायत ने किया। इसमें बगैर कोटेशन व टेंडर प्रक्रिया के भुगतान हुआ। इसमें जांच अधिकारियों ने जिम्मेदारों को दोषी ठहराया। वहीं तिलोई, जगदीशपुर, भादर, बाजार शुकुल एवं जामो में एकल संचालन से धन निकाला गया। जबकि इसे बीडीओ एवं एडीओ पंचायत के संयुक्त हस्ताक्षर से संचालित होना था।
जांच अधिकारी ने रिपोर्ट में बताया कि पंचायती राज लखनऊ निदेशक की ओर से 26 अगस्त 2020 को जारी पत्र के क्रम में तकनीकी एवं प्रशासनिक मद से चार लाख से अधिक की धनराशि खर्च न करने का निर्देश दिया गया था। बावजूद इसके भेटुआ, तिलोई, सिंहपुर, जामो, बहादुरपुर, भादर, अमेठी ने चार लाख रुपये से अधिक की धनराशि निकाल ली। पंचायती राज निदेशक उत्तर प्रदेश के 24 जून 2020 के पत्र के बाद इन खातों से लेनदेन रोक दिया गया। बावजूद इसके तिलोई, जगदीशपुर, सिंहपुर, संग्रामपुर, गौरीगंज, शाहगढ़ एवं बाजार शुकुल में खातों से पैसा निकाला गया। दोनों अधिकारियों ने डीपीआरओ को 21 नवंबर 2022 को रिपोर्ट दी थी। डीएम को भी इस संबंध में कई बार जानकारी दी गई लेकिन डीपीआरओ दोषियों को बचाने में जुटे हैं।
डॉ. अवधेश मिश्र का आरोप है कि डीपीआरओ की भूमिका संदिग्ध है। हाईकोर्ट के निर्देश पर भी वे जांच अधिकारियों को अभिलेख नहीं उपलब्ध करा रहे थे। जांच रिपोर्ट मिलने पर भी कोई कार्रवाई नहीं की। इस मामले में अवमानना की कार्रवाई चल रही है।
डीपीआरओ श्रीकांत यादव ने आरोपों को गलत बताया। कहा कि जांच में दोषी मिले 11 एडीओ पंचायत के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी जा चुकी है। चार बीडीओ के खिलाफ रिपोर्ट भी जल्दी ही डीएम के माध्यम से शासन को भेज दी जाएगी।