अमेठी सिटी। जिले की गर्भवती महिलाओं व प्रसूताओं के लिए सात साल से चल रही प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना अब दो विभागों के बीच में फंसकर रह गई है। स्वास्थ्य विभाग से योजना छिन जाने के बाद यह बाल विकास विभाग को सौंप दी गई है। योजना के संचालन न होने पर जिले की 1,379 पात्र महिलाएं आवेदन करने से वंचित रह गई हैं।
वर्ष 2017 में शुरू हुई प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना मार्च 2024 तक स्वास्थ्य विभाग से संचालित होती रही। आशा व एएनएम के माध्यम से लाभार्थियों को चिह्नित कर उन्हें प्रोत्साहन राशि दी जाती थी। पहले बच्चे के जन्म पर मां को तीन हजार रुपये व टीकाकरण पूरा होने पर 2,000 रुपये देने का नियम है। दूसरी बार में बालिका का जन्म होने पर मां को एकमुश्त 6000 रुपये दिए जाते हैं। शासन की ओर से अप्रैल में यह योजना स्वास्थ्य विभाग से महिला कल्याण विभाग व बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को हस्तांतरित कर दी गई।
स्वास्थ्य विभाग से जिम्मेदारी हटने के बाद आशा व एएनएम ने योजना के तहत काम करना बंद कर दिया। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई। वहां, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मैपिंग का कार्य अभी तक पूरा न होने से योजना का क्रियान्वयन शुरू नहीं हो सका।
आठ माह से नहीं मिला मानदेय
प्रधानमंत्री मातृ वंदना के लिए जिले में एनएचएम के तहत वर्ष 2020 में कर्मचारी संविदा पर नियुक्त किए गए थे। अप्रैल से योजना बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को हस्तांतरित हो गई। तब से कर्मचारियों को मानदेय भी नहीं मिला। उन्हें स्वास्थ्य विभाग में ड्यूटी करनी है या फिर बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में, इसपर भी असमंजस बरकरार है। मार्च के बाद से किसी भी लाभार्थी का भुगतान भी नहीं हुआ है।
चल रही आवेदन व सत्यापन की प्रक्रिया
सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना अब शासन के निर्देश पर बाल विकास विभाग के अधीन हो गई है। जब तक स्वास्थ्य विभाग के पास योजना रही पात्रों को लाभ दिलाया गया। अब योजना विभाग से संचालित नहीं है।
वहीं, डीपीओ संतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि योजना बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के पास आने के बाद आवेदन प्रक्रिया शुरू करते हुए पात्रों को लाभान्वित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। जो भी आवेदन मिल रहे हैं उनके सत्यापन का काम भी हो रहा है। जल्द ही पात्रों को योजना से लाभान्वित किया जाएगा।