मुसाफिरखाना। रामलीला मैदान में शनिवार रात कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन हुआ। इसमें कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
राज्यमंत्री सोहनलाल श्रीमाली और क्षेत्रीय विधायक राकेश प्रताप सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद कवियों की प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ। हास्य कवि प्रमोद पंकज ने पढ़ा कि हंसते-हंसते सच कह दूं, यही मेरी पहचान है... से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। ओज कवि विनय शुक्ल ने पंक्तियां सुनाईं कि रग-रग में है देश बसता, यही मेरी पहचान है... जिससे पंडाल में जोश भर गया।
प्रयागराज के बिहारी लाल अंबर ने पढ़ा कि समाज की सच्चाई लिखना ही कलम का धर्म है...। संतोष दीक्षित ने पंक्तियां सुनाईं कि आईना दिखाता शब्द, यही कविता का काम है... जिसे श्रोताओं ने सराहा। अंबेडकरनगर की गीता त्रिपाठी ने कहा कि ममता के आंचल में ही जीवन की हर आस है...। मुशायरे में निर्झर प्रतापगढ़ी ने पढ़ा कि लफ्जों में ढल जाए दर्द तो शायरी बन जाती है, जिस पर खूब तालियां बजीं।
कार्यक्रम के दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल ऋषभ शुक्ला का नागरिक अभिनंदन हुआ। अतिथियों ने उन्हें स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस मौके पर एसडीएम अभिनव कनौजिया समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।