जगदीशपुर। इन्हौना के अशरफपुर मजरे अंगूरी निवासी हाईकोर्ट के अधिवक्ता तरुण कुमार ओझा (37) की मंगलवार देर शाम कमरौली स्थित शिव शक्ति हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर में उपचार के दौरान मौत हो गई। इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने अस्पताल परिसर में प्रदर्शन किया। रिपोर्ट दर्ज होने तक शव ले जाने से इन्कार कर दिया। देर रात पुलिस ने डॉक्टर और उनके सहायक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की तब जाकर परिजन शांत हुए।
मृतक के पिता नंद कुमार ओझा ने बताया कि 20 जुलाई की शाम बुखार आने पर तरुण को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भर्ती के समय प्लेटलेट्स 37 हजार थीं। आरोप है कि उपचार के दौरान प्लेटलेट्स घटकर सात हजार रह गईं, लेकिन समय रहते न बेहतर इलाज मिला और न ही दूसरे अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में ब्लड बैंक की सुविधा नहीं होने से प्लेटलेट्स की व्यवस्था भी परिजनों को करनी पड़ी। हालत अधिक बिगड़ने पर लखनऊ ले जाने की बात कही गई, लेकिन उससे पहले ही उनकी मौत हो गई।
मौत की जानकारी पर परिजन और ग्रामीण अस्पताल पहुंच गए और लापरवाही का आरोप लगा प्रदर्शन करने लगे। क्षेत्राधिकारी अतुल सिंह, थाना प्रभारी कमरौली मुकेश पटेल और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। देर रात तक चली वार्ता के बाद अयोध्या के गोसाईंगंज के देवरा सरैया निवासी डॉ. राज बहादुर यादव और बाजारशुकुल के बलापुर निवासी सहायक शैलेंद्र मौर्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। क्षेत्राधिकारी अतुल सिंह ने बताया कि मामले की विवेचना की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
तीन डॉक्टरों की टीम करेगी जांच
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि मामले की जांच के लिए डॉ. प्रवीण कुमार उपाध्याय, डॉ. प्रदीप तिवारी और डॉ. शरद चंद्र वर्मा की तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम पैनल से कराया जा रहा है। जांच टीम उपचार, उपलब्ध सुविधाओं, रेफर करने की परिस्थितियों और अस्पताल के अभिलेखों की जांच कर रिपोर्ट देगी।
उपचार में लापरवाही से किया इन्कार
अस्पताल संचालक डॉ. राज बहादुर यादव ने बताया कि मरीज गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। परिजनों को शुरुआत में ही लखनऊ ले जाने की सलाह दी गई थी। उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई। लगाए गए आरोप निराधार हैं।
हर आंख नम, हर जुबां पर तरुण की चर्चा
सिंहपुर। तरुण की मौत की खबर गांव पहुंचते ही चारों तरफ मातम पसर गया। पिता नंद कुमार ओझा बदहवास हो गए। बड़े भाई वरुण, छोटे भाई विष्णु और बहन रश्मि का रो-रोकर बुरा हाल था। घर पर देर रात तक ग्रामीणों और रिश्तेदारों का तांता लगा रहा। ग्रामीणों ने बताया कि तरुण मिलनसार और मददगार स्वभाव के थे।
तरुण कुमार ओझा
तरुण कुमार ओझा