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असल में मृत, परिवार रजिस्टर में जीवित

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भादर (अमेठी)। ग्राम पंचायतों का परिवार रजिस्टर मनमाने ढंग से अपडेट किया जा रहा है। गांव के पंचायत सचिव जमकर मनमानी कर रहे हैं। ऐसे में कहीं मृतकों का नाम रजिस्टर में अंकित है तो कहीं परिवार के सदस्यों का नाम ही गायब है। जानकारी होने पर ऐसे परिवार के लोग पंचायत सचिव की परिक्रमा करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मनमाने तरीके से पंचायत कर्मियों ने परिवार रजिस्टर में प्रविष्टियां भरी हैं। ऐसे में नकल की जरूरत पड़ने पर खामियों को दुरुस्त कराने के लिए कार्यालयों की गणेश परिक्रमा करनी पड़ती है। बावजूद इसके नाम बढ़वाने तथा खामियों को दुरुस्त कराने के लिए सुविधा शुल्क देना पड़ता है।
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ग्राम पंचायतों का सबसे महत्वपूर्ण अभिलेख परिवार रजिस्टर होता है। परिवार रजिस्टर में गांव में रह रहे परिवार के सभी सदस्यों के नाम से लेकर उनकी उम्र, जन्म व मृत्यु की तिथि अंकित की जाती है। इन दिनों परिवार रजिस्टर ग्राम पंचायत अधिकारियों की मनमानी की भेंट चढ़ गया है। आलम यह है कि ग्राम पंचायत अधिकारी रजिस्टर में न तो बढ़े हुए लोगों की संख्या दर्शा रहे हैं और न ही परिवार के मृतक सदस्य की मौत की तिथि अंकित कर रहे हैं। यहीं नहीं कई वर्ष पहले मृत लोगों का नाम भी रजिस्टर में दर्ज है। रजिस्टर में नवजात शिशुओं के जन्म व बेटियों की शादी के बाद उनके ससुराल चले जाने तथा घर में बेटे की शादी के बाद बहू के आगमन की प्रविष्टियां तक नहीं की जा रही हैं।
कई गांवों में तो परिवार रजिस्टर से पूरे परिवार का ही नाम गायब है, जबकि बाहर रह रहे दूसरे गांव के लोगों का नाम रजिस्टर में दर्ज कर फर्जीवाड़ा किया गया है। अधिकारियों की उदासीनता एवं कर्मचारियों की मनमानी का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, अग्रेसर, सोनारी, रामचन्द्रपुर, पीपरपुर, रामगंज, रायपुर, छीड़ा, सांगापुर, लहना, मोचवा, दुर्गापुर, नरबहनपुर, कुरंग, ढेंमा, आलमपुर, खानापुर, नगरडीह व रेवड़ा आदि गांवों के परिवार रजिस्टर खामियों का भंडार है।
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आधे परिवार का नाम गायब
रायपुर निवासी विजय प्रकाश गुप्ता के अनुसार परिवार रजिस्टर से उनके परिवार के 50 फीसदी लोगों का नाम गायब है। रजिस्टर में उनके परिवार के साथ कुछ फर्जी लोगों का नाम दर्ज है। ऐसे में परिवार रजिस्टर की नकल लेना टेढ़ी खीर हो गई है।
सचिव मांग रहे सुविधा शुल्क
पीपरपुर गांव निवासी दशरथ सिंह कहते हैं कि उनके गांव के परिवार रजिस्टर में खामियां ही खामियां हैं। पंचायत सचिव को रजिस्टर पर दर्ज त्रुटियों को दुरुस्त कराने के नाम पर रिश्वत देनी पड़ती है। रिश्वत देने के बाद भी कई दिनों तक सचिव की गणेश परिक्रमा करने के बाद नकल मिलती है।
नहीं बढ़ाया गया नाम
छीडा निवासी केदार नाथ वर्मा कहते हैं कि उनके गांव का परिवार रजिस्टर खामियों का भंडार है। आज भी गांव के ज्यादातर मृतकों का नाम नहीं हटाया गया है। पैदा हुए बच्चों तथा बहुओं का नाम भी नहीं बढ़ाया गया है।
आसानी से नहीं मिलती नकल
खानापुर निवासी नरेंद्र शर्मा कहते हैं कि नकल लेने के लिए बार-बार दौड़ाया जाता है। रजिस्टर में मौजूद खामियों को दुरुस्त कराने के लिए जिम्मेदारों की परिक्रमा लगानी पड़ती है।
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