अमेठी सिटी। स्टांप पेपर की ओवररेट बिक्री पर रोक नहीं लग पा रही है। वेंडर लोगों का शोषण कर रहे हैं। 10 रुपये के स्टांप पेपर के लिए दोगुनी कीमत वसूली जा रही है। जिला मुख्यालय पर भी अफसरों की आंखों के सामने महंगे दाम पर स्टांप वेंडर खुलेआम लोगों का शोषण कर रहे हैं। वे खुलेआम कह रहे हैं कि कमीशन कम मिलेगा तो स्टांप महंगा बेचेंगे।
छात्रवृत्ति फार्म भरने के साथ भर्तियों के लिए जरूरतमंद ईडब्ल्यूएस (इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन) प्रमाणपत्र बनवा रहे हैं। इसके अलावा तहसील में पेंशन, आवास सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के आवेदकों की भीड़ लगी रहती है। ई स्टांप वेंडर लोगों से स्टांप पर छपी कीमत से ज्यादा पैसा ले रहे हैं, जिसको लेकर लोग आपत्ति कर रहे हैं। शुक्रवार को जिला मुख्यालय गौरीगंज तहसील में आकाश स्टांप वेंडर के यहां 10 रुपये का स्टांप पेपर लिया गया। स्टांप विक्रेता ने पंजीकरण करते हुए 10 रुपये का ई स्टांप निकाला। वेंडर ने 10 का स्टांप 20 रुपये में दिया। वेंडर ने बताया कि 50 और 100 रुपये के स्टांप पर 20 रुपये अतिरिक्त और 500 के स्टांप पर 100 रुपये अतिरिक्त लिया जाता है। वहीं, स्टांप वेंडर कमलेश ने बताया कि स्टांप लेना है तो छपे मूल्य से अधिक दाम देना पड़ेगा।
कई वेंडरों से स्टांप को छपे मूल्य से अधिक पर बेचने का कारण पूछा गया तो बताया कि पहले कमीशन एक प्रतिशत मिलता था। ई स्टांप व्यवस्था लागू होने के बाद कमीशन 10 पैसा हो गया है। कमीशन कम मिलने के कारण अधिक मूल्य पर स्टांप बेच रहे हैं। कहा कि प्रिंटर, बिजली, रजिस्टर आदि का भी इसी से खर्च निकालने संग अपनी भी मजदूरी निकालनी पड़ती है।
जांच कराकर होगी कार्रवाई
एडीएम अर्पित गुप्ता ने बताया कि स्टांप पर छपे निर्धारित मूल्य पर ही बिक्री करने का आदेश है। कहा कि अगर निर्धारित मूल्य से अधिक पर स्टांप बेचा जाता है तो जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।