अमेठी। सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज और दवा उपलब्ध कराने के दावों की हकीकत जिले में सवालों के घेरे में है। जिले के आयुर्वेदिक और यूनानी अस्पतालों में जरूरी दवाओं का स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है। इलाज के लिए पहुंच रहे मरीजों को पर्ची तो मिल रही है, लेकिन दवाएं न मिलने के कारण उन्हें निजी मेडिकल स्टोरों से महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
जिले के 25 शैया वाले राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय समेत 18 अन्य आयुर्वेदिक अस्पतालों और नौ यूनानी अस्पतालों में दवाओं की आपूर्ति ठप पड़ी है। अधिकांश अस्पतालों में केवल कुछ चूर्ण और सीमित औषधियां ही उपलब्ध हैं, जबकि गंभीर बीमारियों में उपयोग होने वाली गोलियां, काढ़ा, तेल, सिरप और गुग्गुल जैसी आवश्यक दवाएं खत्म हो चुकी हैं। कई स्थानों पर भस्म और चूर्ण तो मौजूद हैं, लेकिन उनके साथ दी जाने वाली सहायक औषधियां नहीं होने से मरीजों को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा।
अस्पतालों में रोज बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन दवा काउंटर से उन्हें निराश लौटना पड़ रहा है। अमेठी की ललिता ने बताया कि जोड़ों के दर्द के इलाज के लिए उन्हें नियमित काढ़ा और विशेष गोलियां चाहिए थीं, लेकिन अस्पताल में सीमित दवाएं ही मिलीं। मजबूरी में उन्हें निजी मेडिकल स्टोर से करीब 300 रुपये की दवाएं खरीदनी पड़ीं।
रविशंकर पांडेय ने बताया कि पेट और साइटिका की समस्या के इलाज के लिए वह आयुर्वेदिक अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन वहां जरूरी सिरप उपलब्ध नहीं था। इसके बाद उन्हें बाहर से दवा खरीदनी पड़ी। मरीजों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो रहा। उनका आरोप है कि मुफ्त इलाज के नाम पर केवल पर्ची मिल रही है, जबकि दवाओं का खर्च उन्हें अपनी जेब से उठाना पड़ रहा है।
दवा संकट का असर डॉक्टरों के कामकाज पर भी पड़ रहा है। सीमित संसाधनों के चलते चिकित्सकों को वैकल्पिक दवाओं से काम चलाना पड़ रहा है, जिससे उपचार की प्रभावशीलता प्रभावित होने की आशंका है। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि यदि जल्द आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो परेशानी और बढ़ेगी।
जल्द आपूर्ति का दावा
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. अब्दुल बारी ने बताया कि दवा निर्माण में आई तकनीकी बाधाओं के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि इसी सप्ताह सभी अस्पतालों में आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे मरीजों को राहत मिल सके।