गौरीगंज (अमेठी)। फरवरी में हल्की बारिश व ओलावृष्टि के साथ पड़ रहे कोहरे के कारण सरसों, चना और आलू की फसल में कीट लगने के साथ ही रोग फैलने की आशंका बढ़ गई है। सबसे अधिक सरसों की फसल में माहू का खतरा बढ़ा है। ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ गई। कृषि विभाग ने एडवाइजरी जारी कर दवाओं का छिड़काव कर फसल को बचाने की सलाह दी है।
जनवरी के बाद फरवरी में लगातर मौसम परिविर्तत होने के साथ बरसात व ओलावृष्टि के बाद कोहरा समाप्त नहीं हो रहा है। इस कारण किसानों की चिंता की बढ़ गई है। मौसम परिवर्तित होने से सरसों में माहू व आलू में झुलसा रोग का खतरा बढ़ गया है। फसलों में रोग का प्रकोप नियंत्रित कर किसानों की परेशानी कम करने के लिए जिला कृषि अधिकारी अखिलेश पांडेय ने एडवाइजरी जारी की है।
बताया कि माहू के कीट सरसों के फूलों का रस चूसते हैं। इससे उसमें फलियां नहीं बनतीं। इसके लिए किसान एजाडिरक्टिन 0.15 प्रतिशत ईसीजी की ढाई लीटर मात्रा को 500-500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। दोपहर दो बजे के बाद ही छिड़काव करना बेहतर होगा। चना और मटर में फली भेदक और सेमीलूपर कीट लगने की आशंका है। इसके लिए बीटी एक किलो या एनपीपी दो प्रतिशत 300 लीटर पानी में बनाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करना ठीक होगा।
इस मौसम में पिछैती आलू में झुलसा रोग लग सकता है। जिनेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी दो किलो को 500 लीटर पानी में मिलाकर एक हेक्टेयर में छिड़काव करना कारगर होगा। कृषि अधिकारी ने किसानों को फसल से जुड़ी अन्य किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर कार्यालय से संपर्क करने को कहा है।