अमेठी। जिले में गुरुवार को मानसून की झमाझम बारिश से जहां मौसम खुशगवार हो गया वहीं किसानों के चेहरे खिल गये। अधिकतर किसान धान की रोपाई में लग गये। तमाम किसान तो धान की नर्सरी तैयार हो जाने के कारण पंप से सिंचाई करके रोपाई कर रहे थे। इस बारिश से जहां रोपाई आसान हो गई वहीं, खेती की लागत में भी कुछ कमी आएगी।
कृषि विज्ञान केंद्र कठौरा के अध्यक्ष डॉ. आरके आनंद ने बताया कि बृहस्पतिवार को यह पहली मानसूनी बारिश थी। इस बरसात से धान की रोपाई में ज्यादा मदद मिलेगी। जिन किसानों की नर्सरी तैयार हो गई है वे अति शीघ्र रोपाई प्रारंभ करें। जो किसान किसी कारणवश नर्सरी नहीं डाल पाए थे या जिनकी नर्सरी खराब हो गई है वे अब ड्रम सीडर मशीन से धान की सीधी बोआई लाइन में कर सकते हैं।
इस तकनीक में रोपाई की तरह ही खेत की तैयारी की जाती है। धान के बीज को अंकुरित कर ड्रम सीडर मशीन में भर देते हैं और मशीन को लेव लगे खेत में चला देते हैं। इससे लाइन में बीज की बोआई हो जाती है। ये तकनीक रोपाई से काफी सस्ती है। उत्पादन पर बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता है।
डॉ. आनंद ने किसानों को खेत की सभी मेड़ों को मजबूत कर वर्षा जल संरक्षण का सुझाव दिया और बताया कि गिरते हुए जलस्तर को रोकने के लिए अधिक से अधिक वर्षा जल का संरक्षण करें। इससे मिट्टी का क्षरण भी रुक जाता है।
ऊंचाई पर स्थित खेत जहां पानी कम रुकता हो वहां धान की जगह अरहर, सावां, कोदो, मंडुआ जैसी फसलों की बोआई कर अच्छा लाभ प्राप्त किया जा सकता है। धान में लगने वाले रोगों से बचाव के लिए धान की नर्सरी को कार्बेंदाजिम दो ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल में कम से कम आधा घंटा उपचारित करें। ऐसा करने से कंडुआ जैसे रोगों का प्रकोप कम हो जाता है।