सिंहपुर (अमेठी)। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ पाने के लिए अपने जरूरी कागजात जमा कराने के बाद भी किसान दर-दर भटक रहे हैं। अधिकतर के खाते में अब तक पैसा ही नहीं आया। कुछ के खातों में एक या दो किस्त आने के बाद निधि आनी बंद हो गई। तहसील मुख्यालयों पर किसानों की सुनवाई करने वाला कोई नहीं मिल रहा।
इस योजना के तहत बड़ी संख्या में किसानों को पंजीकरण के बाद लॉक कर दिया गया है। चुनाव के चलते बहुत से अपात्र किसानों के खाते में किस्त भेज दी गई है। अब आवेदन भर चुके किसानों के सत्यापन का और गलत खातों के संशोधन का काम किया जा रहा है।
लघु एवं सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना फरवरी 2019 के बजट में लागू की गई। इसके तहत किसानों के खाते में छह हजार रुपये धनराशि सालाना भेजी जाने का प्राविधान निश्चित किया गया।
तब से चार-चार महीने पर तीन बार दो हजार रुपये की किस्त दी जा रही है। इसके लिए किसानों का कृषि विभाग की वेबसाइट पर पंजीकरण कराने के साथ ही आधार कार्ड, बैंक पासबुक तथा खतौनी देकर लेखपालों से इस योजना में फीडिंग करानी होती है।
इस समय आवेदनों का सत्यापन शुरू हो गया है। आधार, पासबुक व खतौनी में नाम, खाता नंबर या स्पेलिंग के मिस मैच करते ही किसानों के आवेदन जहां अस्वीकार हो जा रहे हैं, वहीं गलत खातों में आए पैसों की रिकवरी भी होने लगी है।
कई किसानों की गलत खाते की वजह से किस्तें नहीं आई हैं। ऐसे किसान सही जानकारी या संशोधन के लिए संबंधित ब्लॉकों के कृषि बीज गोदाम पर तिलोई तहसील व जिला मुख्यालय पर जिला कृषि अधिकारी कार्यालय पहुंच रहे हैं। विभाग ने किसानों की समस्या के समाधान के लिए ब्लॉक स्तर पर तकनीकि सहायक तैनात किए हैं। कुछ की तो ग्राम पंचायतवार नियुक्ति भी कर दी गई है।
बावजूद इसके वे अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहे हैं। सिंहपुर राजकीय बीज गोदाम प्रभारी डॉ. पवन वर्मा का कहना है कि जिन किसानों के खाते में पैसा आ गया है वह आगे आता रहेगा। आवेदन में गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए कुछ कागजात जमा कराया गया है। ब्लॉक स्तर पर भी इसके लिए कर्मचारी तैनात किए गये हैं।
यह होते योजना के पात्र
योजना के तहत वही पात्र हैं, जो पूरी तरह से किसान हैं। पेंशन या वेतन प्राप्त करने वाला जन प्रतिनिधि या सरकारी कर्मचारी इसका लाभ नहीं ले सकते। सत्यापन में इन कारणों से भी लोगों को अपात्र घोषित किया जा रहा है।
किसान के पास दो हेक्टेयर अर्थात आठ बीघा से कम जमीन होने के साथ ही घर में कोई नौकरी पेशा वाला नहीं हो और वह आयकर रिटर्न भी नहीं दाखिल करता हो। मासिक पेंशन भी अगर दस हजार से अधिक है या मां-बाप, पति-पत्नी कोई भी सरकारी सेवा या पेंशनभोगी हैं। ऐसे लोग भी इस योजना के पात्र नहीं हो सकते।
किसानों के बोल
जैतपुर निवासी विजय कुमार सिंह बताते हैं कि हमने पीएम किसान सम्मान निधि के लिए पंजीयन कराया लेकिन आज तक पैसा नहीं आया। कई बार बीज गोदाम सिंहपुर भी गया तो अक्सर वहां यही बताता जाता रहा कि इस समय साइट नहीं चल रही। सबके खातों में पैसा आता है हमारे में नहीं आता है तो कुंठा होती है।
सकतपुर निवासी सुरेश कुमार कहते हैं कि मेरे खाते में पीएम किसान निधि का दो बार पैसा आया। उसके बाद बंद हो गया। कई बार बीज गोदाम पर जाकर प्रपत्र देने के बावजूद अब तक एक भी राशि नहीं आई। कर्मचारियों की मानें तो यहां से सही हो गया है दिल्ली से गड़बड़ है। हरीराम कहते हैं कि कई बार रजिस्ट्रेशन कराया लेकिन आज तक पैसा नहीं आया।
लाल बहादुर कहते हैं कि कुछ लोग तो लैपटॉप लेकर गांव आ जाते हैं और पीएम किसान सम्मान सही करने के नाम पर भोले भाले किसानों को ठगते रहते हैं। यही हाल इस समय केवाईसी करने के नाम पर गोरखधंधा चल रहा है। बड़ी संख्या में लोगों के आधार से मोबाइल नंबर नहीं लगे हैं उनका नंबर लगाने के नाम पर भी जमकर शोषण हो रहा है।