फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Amethi News: नकद जमा कराए दो लाख, ऑनलाइन लौटाए सिर्फ 10 से 20 हजार

Fri, 19 Sep 2025 12:25 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
विज्ञापन
विज्ञापन
अमेठी। अमेठी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल एंड साइंस का खेल खुलने लगा है। छात्र अब खुलकर संस्थान के खिलाफ बोल रहे हैं। कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। बता रहे हैं कि प्रवेश के समय पूरी फीस नकद जमा कराई गई। फर्जीवाड़ा दबाने के लिए ऑनलाइन 10 से 20 हजार रुपये लौटाए गए।
विज्ञापन

जायस निवासी विशाल दुबे ने बताया कि प्रवेश के समय दो लाख रुपये नकद जमा किए थे। परीक्षा देने का अवसर नहीं मिला, तो फीस वापस मांगनी शुरू की। इस पर संस्थान ने महज 10 हजार रुपये ऑनलाइन लौटाए गए। बाकी रकम हड़प ली। इसी तरह मुसाफिरखाना निवासी कपिल ने बताया कि उन्होंने भी प्रवेश के समय दो लाख रुपये नकद दिए थे। एडमिट कार्ड नहीं मिलने के कारण परीक्षा में बैठ नहीं सके। बार-बार दबाव डालने पर केवल 60 हजार रुपये संस्थान ने लौटाए।



प्रशासनिक टीम कर रही जांच
सीडीओ सूरज पटेल ने बताया कि पैरामेडिकल संस्थानों की जांच चल रही है। मान्यता सहित सभी दस्तावेज की पड़ताल हो रही है। हर बिंदु पर जांच पूरी करने के बाद सात दिन के भीतर रिपोर्ट डीएम को सौंपी जाएगी।
विज्ञापन



लगातार दबिश दे रही पुलिस
अमेठी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल एंड साइंस से जुड़ी ठगी के मामले में छह आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है। संचालक प्रिंस उर्फ आजाद, प्राचार्य विवेक श्रीवास्तव और आयुष तिवारी को जेल भेजा जा चुका है। आरोपी शैलेंद्र मौर्य, विजय मौर्य, बृजेश, दिलीप बाजपेयी, रेहान खान और आलीशान हाथ नहीं आए। इंस्पेक्टर अमेठी रवि कुमार सिंह ने बताया कि संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। टीमें गैर जनपदों में भी तलाश कर रही हैं। जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।


पैरामेडिकल संस्थानों की हकीकत परख कर ही लें प्रवेश
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि अभिभावक और छात्र जागरूक रहें। बिना मान्यता वाले संस्थान में दाखिला लेने से मेहनत की कमाई और बच्चों का भविष्य दोनों खतरे में पड़ जाते हैं। सबसे पहले हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संबंधित संस्थान को राज्य सरकार या केंद्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग से मान्यता मिली है या नहीं। संबद्धता और पंजीकरण की जानकारी सरकारी पोर्टल या विभागीय वेबसाइट से हासिल कर सकते हैं।

बेटी का भविष्य अधर में, पिता कर्ज तले दबे
सोमपुर मकंठ निवासी प्रिंशू तिवारी के पिता रामशंकर किसान हैं। उन्होंने बेटी को एएनएम बनाने का सपना देखा। अमेठी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल एंड साइंस में 2023 में दाखिला कराया। संस्थान की ओर से बताया गया कि मान्यता प्राप्त है। रामशंकर ने लोन लेकर पहले साल एक लाख रुपये जमा कराए। संचालक ने छात्रवृत्ति का भरोसा दिया, लेकिन मिली नहीं। परीक्षा का समय आया, तो बताया गया कि जौनपुर के मां. पंधाय इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंस में परीक्षा होगी। वहां जाने पर पता चला कि संस्था के नाम पर उनके साथ धोखा हुआ है। लेकिन सोचा कि चलो किसी तरह बेटी को डिग्री मिल जाए। दूसरे साल प्रवेश के दौरान एक लाख रुपये लिए गए। परीक्षा के समय पता चला कि एडमिशन ही नहीं कराया गया है।

मजदूरी छोड़ फीस वापसी के लिए दौड़ रहे स्वामीनाथ

गौरीगंज के अमिया निवासी स्वामीनाथ ने दिहाड़ी मजदूर हैं। उन्होंने बेटी कोमल की पढ़ाई के लिए कर्ज लिया। बड़े अरमान के साथ बेटी को एएनएम बनाने के लिए संस्था की खोज शुरू की। इसी बीच अमेठी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल एंड साइंस के लोग मिले, जिन्होंने बड़े-बड़े सपने दिखाए। कहा कि दो लाख रुपये जमा होंगे और यहीं परीक्षा होगी। छात्रवृत्ति मिलेगी, फीस का पैसा लौट जाएगा। संस्था का फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद पढ़ाई अधूरी रह जाने से कोमल परेशान है, वहीं, स्वामीनाथ मजदूरी छोड़ अफसरों के पास फीस वापसी की गुहार लगा रहे हैं।



दो लाख डूबे, पिता-पुत्री दोनों परेशान
गौरीगंज के संभावा निवासी धनराज पाल की बेटी सलोनी ने पैरामेडिकल कोर्स में दाखिला लिया। दो लाख रुपये जमा किए, लेकिन उनके हाथ निराश लगी। बेटी परेशान है, सो अलग। सलोनी का भविष्य अधर में है। परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया है। सलोनी के परिवारीजन का कहना है कि प्रशासन उनकी मदद करे और बेटी की पढ़ाई किसी अच्छे संस्थान से पूरी कराए।


जांच के बाद होगी कार्रवाई

डीएम संजय चौहान ने बताया कि अमेठी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल एंड साइंस की ओर से छात्राओं के साथ किया गया फर्जीवाड़ा संज्ञान में है। केस दर्ज है। मामले की नौ सदस्यीय टीम जांच कर रही है। जांच के बाद पहले बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जाएगा और उसके बाद संस्थान को सील किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें