जिला अस्पताल समेत सीएचसी व पीएचसी पर उमड़ रही भीड़
उपचार के साथ सावधानियां बता रहे डॉक्टर
संवाद न्यूज एजेंसी
अमेठी सिटी। ठंड बढ़ने के साथ सरकारी व निजी अस्पतालों में कोल्ड डायरिया के मरीज बढ़ गए हैं। ओपीडी में आने वाले बीमार बच्चों में लगभग 20 प्रतिशत बच्चे कोल्ड डायरिया के आ रहे हैं। इसके अलावा जुखाम, खांसी, बुखार और त्वचा रोग संबंधी मरीज आ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि बच्चों को ठंड से बचाने के तरीके अपनाने चाहिए और साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए।
बीते चार दिनों में तापमान तेजी से लुढ़का है। कोहरे के साथ सर्द हवाओं के कारण गलन बढ़ गई है। इससे लोग बीमार हो रहे हैं। सर्दी, खांसी, बुखार के मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे है। वहीं, हृदय और बीपी मरीजों की परेशानी बढ़ गई है।
जिला अस्पताल में सोमवार को 460 के करीब ओपीडी रही। सामान्य तौर पर पहले कोल्ड डायरिया के मरीजों की संख्या दो या तीन होती थी, लेकिन जब से ठंड बढ़ी है तो ओपीडी में आने वाले कोल्ड डायरिया से पीड़ित बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. लईक-उल्ल-जमा ने बताया कि ठंड लगने से बच्चे बीमार हो रहे हैं। ओपीडी में आने वाले मरीजों में 10-20 बच्चे कोल्ड डायरिया के आ रहे हैं। ठंड का असर सात-आठ साल तक के बच्चों पर ज्यादा पड़ रहा है। इसलिए जरूरी है कि बच्चों को ठंड से बचाया जाए और साफ-सफाई का भी खास ध्यान रखें। अगर किसी बच्चे को कोई शिकायत होती है तो चिकित्सक की सलाह से ही उपचार कराएं।
सेहत का रखें ध्यान
सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद ने बताया कि ठंड के दिनों में सेहत को लेकर लापरवाह रहना भारी पड़ सकता है। ठंड से बचाव करना बेहद जरूरी है। बुजुर्गों और बच्चों को सर्दी परेशान कर रही है। सुबह के समय टहलने वालों को भी गर्म कपड़े पहनकर और शरीर को अच्छी तरह से ढककर बाहर निकलना चाहिए। उन्होंने लोगों से खानपान का विशेष ध्यान रखने, ठंड से बचाव करने और बीमार होते ही चिकित्सक से जांच कराने की अपील की है।
ये बरतें सावधानी
- बच्चे को बासी भोजन न खिलाएं।
- ज्यादा ठंडे पानी को न पिलाए, गुनगुना पानी पिलाएं।
- कमरे को पूरी तरह बंद न रखे, हवा के आवागमन के लिए रोशनदान को खुला रखें।
- रात को सोते समय कमरा बंद कर हीटर या अंगीठी न जलाएं।
- साफ-सफाई का ध्यान रखें, बच्चा स्वस्थ है तो उसे दो-तीन दिन में नहलाते रहें।
- बच्चे को ठंडे पानी में न भीगने दे।
- बच्चों को गीले कपड़े न पहनाएं, अच्छी तरह सुखाए गए कपड़े पहनाएं।
- बच्चे का स्वास्थ्य खराब होने पर चिकित्सक की सलाह से उपचार कराएं।