तिलोई (अमेठी)। कूरा के नारायणपुर मजरे में स्थित प्राथमिक विद्यालय को अब तीन किलोमीटर दूर स्थित कंपोजिट विद्यालय ढोढनपुर में विलय किया गया है। इस निर्णय से ग्रामीण परिवारों की चिंता बढ़ गई है। 24 से अधिक बच्चों का भविष्य अब दूरी, भूख, प्यास और डर के साए में गुजर रहा है।
अधिकांश छात्र-छात्राएं छह से 12 वर्ष की आयु के हैं। अब इन्हें प्रतिदिन दो किलोमीटर लंबा पक्का रास्ता तय कर विद्यालय पहुंचना पड़ता है। तेज धूप, भूख और प्यास से जूझते इन मासूमों की परेशानी समझते हुए उनके अभिभावक प्रशासन से स्कूल पुनः चालू कराने की मांग कर रहे हैं। अभिभावक तेज बहादुर कहते हैं कि हमने मजदूरी करके बच्चों को पढ़ाने का साहस किया था, लेकिन अब ये भी टूटने लगा है। बच्चे सुबह सात बजे खाली पेट स्कूल निकलते हैं। दो घंटे पैदल चलने में लगते हैं। साहब...लौटने की ताकत बचेगी तो पढ़ाई क्या होगी।
राजेश यादव और राम बहादुर पासी बताते हैं कि गांव से जाने का एकमात्र पक्का मार्ग व्यस्त रहता है, जहां हर समय बाइक, ट्रैक्टर और अन्य वाहन चलते हैं। बच्चों की सुरक्षा को लेकर दिनभर घरवालों को चिंता बनी रहती है। एक अन्य विकल्प पगडंडी वाला है, जिससे दूरी तो कम हो जाती है, लेकिन वह रास्ता सुरक्षित नहीं माना जा रहा है।
पगडंडी के आसपास सांप-बिच्छू और जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है, जिस कारण बच्चे मजबूरी में लंबा और जोखिमभरा रास्ता तय करने को विवश हैं। अखिल पासी का कहना है कि निजी विद्यालय में पढ़ाने की उनकी सामर्थ्य नहीं है। हम चाहते हैं कि गांव का विद्यालय फिर से संचालित हो, ताकि छोटे बच्चों को शिक्षा के साथ सुरक्षा भी मिल सके।