गौरीगंज (अमेठी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गुरु नानक जयंती पर देश को संबोधित करते हुए पूर्व में बनाए गए तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का एलान किया। पीएम द्वारा कृषि कानून वापस लेने की घोषणा पर ज्यादातर किसान खुशी से झूम उठे। हालांकि पीएम के एलान पर किसानों की मिली जुली प्रतिक्रिया आई है।
किसान संगठन से जुड़े ज्यादातर लोग पीएम के इस फैसले को देर से लिया गया सही फैसला बता रहे हैं। कुछ किसानों ने महज घोषणा नहीं कानूनों को लिखित में वापस करने की बात कही। तो चंद लोगों का कहना है कि दबाव में देश नहीं चलाया जा सकता है।
इन कानूनों में किसानों का कोई अहित नहीं था। गौरीगंज में किसाना रीता सिंह के साथ महिला किसानों ने सरायभागमानी में तो कई जगह किसानों ने पीएम के फैसले का स्वागत करते हुए जश्न मनाया। किसानों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया।
किसानों की हुई जीत
गौरीगंज के पांडेयपुर मजरे सराय भागमानी गांव निवासी किसान गया प्रसाद पांडेय ने कहा कि कृषि कानून पारित होने के बाद से ही किसान लगातार संघर्षरत थे। कई बार की वार्ता के बाद भी सफलता नहीं मिलने से किसान निराश नहीं हुए और आंदोलन जारी रखा। किसानों की एकता का परिणाम है कि सरकार को कृषि कानून वापस लेना पड़ा। प्रधानमंत्री की ओर से कृषि कानून समाप्त करने की घोषणा किसानों की जीत है।
संघर्ष की जीत
किसान नेता दुर्गाशंकर मिश्र ने कहा कि यह किसान भाइयों के संघर्ष की जीत है। यह उन सभी की जीत है जिन्होंने दिन-रात आंदोलन किया। जो सड़कों पर उतरे। जिन्होंने घरों से दुआएं दीं। जो इस कानून से दुखी थे। यह धैर्य की जीत है। यह लोकतंत्र में विश्वास की जीत है। किसान भाइयों को नमन वंदन। सरकार यदि सच में किसानों का भला चाहती है तो एमएसपी की अनिवार्यता लागू करे। एमएसपी के नीचे की खरीद को अवैध घोषित करे। शहादत देने वाले किसानों को शहीद का दर्जा और परिवारों को मुआवजा दे।
जल्द जारी हो लिखित आदेश
अमेठी। भाकियू जिलाध्यक्ष हरीश सिंह उर्फ चुन्नू ने कहा कि सरकार द्वारा तीनों किसान विरोधी कानून वापस लिया जाना स्वागत योग्य है। लेकिन सरकार की ओर से लिखित रूप से इस पर कार्यवाही करनी चाहिए। सरकार अगर पहले ही यह कदम उठा लेती तो किसानों को इतना बड़ा आंदोलन नहीं करना पड़ता। देर से ही सही सरकार को सद्बुुद्धि आई और सही कदम उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों के हित में कार्य करना चाहिए क्योंकि किसान ही सबका पेट भरता है। (संवाद)
स्वागत योग्य कदम
अमेठी। किसान मनोज शुक्ल ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे किसानों को काफी राहत मिलेगी। किसान अभी तक इस कानून को लेकर परेशान थे। कानून वापस लेने की सूचना मिलने से किसान खुश हैं। सरकार को यह कदम पहले ही उठाना चाहिए था। सरकार ने ऐसा किया होता तो कई किसानों की मौतें नहीं होतीं। (संवाद)
किसानों की भावनाओं का किया सम्मान
संग्रामपुर। किसान शंकर बख्श सिंह ने कहा कि यह कृषि कानून काले कानून के समान थे। केंद्र सरकार ने देर से ही सही पर इन कानूनों को वापस लेकर हम जैसे लाखों किसानों की भावनाओं का सम्मान किया है। इसलिए हम अपने सभी किसानों भाइयों की तरफ से सरकार को बधाई देते हैं कि समय से इन कृषि कानूनों को वापस लेकर सरकार ने अच्छा कदम उठाया है। (संवाद)
हुई किसानों की जीत
संग्रामपुर। किसान सुरेंद्र पांडेय ने बताया कि पीएम मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा ने हर वर्ग को खुशी दी है। यह किसानों की जीत है। अब हमें भी उम्मीद है कि हमारे किसान भाई आंदोलन खत्म कर अपने काम में लग जाएंगे। उनका व्यापार भी अच्छा चलेगा। हम सरकार को इसके लिए बधाई देते हैं। (संवाद)
फैसला ठीक नहीं
अमेठी। किसान देव नारायण पांडेय ने कहा कि सरकार द्वारा किसान कानून वापस लिया जाना ठीक नहीं है। क्योंकि जो कानून बनाए गए थे उसमें किसानों का कहीं अहित नहीं हो रहा था। यह फैसला ठीक नहीं है। (संवाद)
सरकार का फैसला गलत
अमेठी। बागवानी की खेती करने वाले कृषक हरिशंकर तिवारी ने कहा कि कृषि कानून वापस लिया जाना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि लोग इसी तरह आंदोलन कर अन्य कानूनों को भी वापस करने की मांग करेंगे तो क्या सरकार सभी कानूनों को वापस लेगी। (संवाद)