शाहगढ़ (अमेठी)। भागवत कथा मनुष्य को भय से मुक्त करती है। यह बात ब्लॉक के दक्खिन गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में अंतिम दिन प्रवाचक स्वामी पागलदास महाराज ने कही। उन्होंने श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता, राजा परीक्षित मोक्ष प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया।
प्रवाचक ने बताया कि राजा परीक्षित ने महाराज शुकदेव से भागवत कथा सुनी थी। राजा परीक्षित ने सात दिनों तक भावपूर्वक भागवत कथा सुनी और मृत्यु के भय से मुक्त हो गए। कहा कि मनुष्य सांसारिक मोह बंधनों से बंधा हुआ है। यदि वह श्रीमद्भागवत कथा को पूरे भाव से सुनता है तो उसे सभी मोह बंधनों से मुक्ति मिल जाती हैं और भगवान हरि चरणों में स्थान पा लेता है। श्रीमद्भागवत के सभी अक्षर जीवन में नई प्रेरणा देते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का वर्णन करते हुए बताया कि मित्रता को लाभ-हानि के तराजू में नहीं तौलना चाहिए। कृष्ण -सुदामा की मित्रता आज भी हमारे लिए प्रेरणादायक है। इस दौरान समर बहादुर सिंह, काशी प्रसाद मिश्र, उमा शंकर शुक्ला, पिंटू सिंह, लाला सिंह, राम उजागर मिश्र, राम स्वरूप यादव, पप्पू दुबे, राजू दुबे, दुर्गा प्रसाद पाल आदि मौजूद रहे।