अमेठी सिटी। जिले के 415 उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में 10 बैगलेस दिवस आयोजित किए जाएंगे। नवंबर तक शनिवार को होने वाली इन गतिविधियों में विद्यार्थी किताबों से इतर अपने आसपास की चीजों को देखकर, समझकर और करके सीखेंगे। इससे उनमें रचनात्मकता, आत्मविश्वास, समस्या समाधान और काम के प्रति रुचि विकसित करने पर जोर रहेगा।
मिट्टी से खिलौने और कलाकृतियां बनाने, पौधों की देखभाल, कंपोस्ट तैयार करने और विज्ञान के सरल प्रयोगों से बच्चों को व्यावहारिक ज्ञान मिलेगा। जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, मृदा परीक्षण और जैविक खेती की गतिविधियां उन्हें पर्यावरण और कृषि से जोड़ेंगी। सिलाई, जूट क्राफ्ट, कठपुतली और कला से जुड़े कामों से रचनात्मक कौशल विकसित होगा।
स्थानीय कुम्हार, शिल्पकार और अन्य विशेषज्ञों से संवाद कर विद्यार्थी पारंपरिक हुनर तथा व्यवसायों की जानकारी लेंगे। बैंक, डाकघर, पुलिस थाने और स्थानीय उद्योगों के भ्रमण से उन्हें सार्वजनिक सेवाओं और कामकाज की वास्तविक जानकारी मिलेगी। ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा से स्थानीय इतिहास और संस्कृति को समझने का अवसर मिलेगा। आधुनिक तकनीक से जुड़ी गतिविधियों में एआई, रोबोटिक्स, स्क्रैच कोडिंग, ड्रोन और सेंसर शामिल हैं। इससे बच्चों को भविष्य की तकनीकी दुनिया से शुरुआती परिचय मिलेगा। 14 नवंबर को बाल मेले में विद्यार्थी अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत करेंगे।
बीएसए संजय कुमार तिवारी ने बताया कि बैगलेस दिवस में बच्चों को स्थानीय परिवेश और उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा।
बैगलेस दिवस के लिए मिले 26.97 लाख
415 उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों के लिए कुल 26.975 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। प्रत्येक विद्यालय को 6,500 रुपये की दर से राशि मिलेगी। अगस्त में मिट्टी कला, कुम्हार-शिल्पकार से कौशल सीखने, औषधीय पौधों और कंपोस्ट से जुड़ी गतिविधियां होंगी। सितंबर में जल संरक्षण, कृषि, स्वास्थ्य-सफाई, चाइल्ड सेफ्टी, सिलाई, कठपुतली, जूट क्राफ्ट और विज्ञान गतिविधियां होंगी। अक्तूबर में भ्रमण, कला-संस्कृति, स्थानीय उद्योग और एआई, रोबोटिक्स, कोडिंग, ड्रोन व सेंसर से जुड़ी गतिविधियां कराई जाएंगी। नवंबर में बाल मेले का आयोजन होगा।