अमेठी। सुंदरपुर मजरे दरखा गांव में बुधवार रात जमीन के विवाद में छप्पर में लगाई गई आग से किसान रामसजीवन गुप्ता (45) गंभीर रूप से झुलस गए। बृहस्पतिवार को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों ने शुक्रवार को रामसजीवन के भाई और दो भतीजों पर हत्या का आरोप लगाते हुए घर के सामने शव रखकर प्रदर्शन किया। एफआईआर दर्ज होने का भरोसा मिलने के बाद देर शाम अंतिम संस्कार किया गया। घटना के बाद गांव में पुलिस बल तैनात किया गया है।
फूलपती के अनुसार, उनके देवर रामसजीवन गुप्ता का परिवार के ही लोगों से लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। बुधवार रात करीब नौ बजे रामसजीवन छप्परनुमा घर में थे। रामसजीवन के छोटे भाई जगन्नाथ गुप्ता और उसके दोनों बेटों सचिन व सतीश ने छप्पर में आग लगा दी। आग की चपेट में आने से रामसजीवन गंभीर रूप से झुलस गए। शोर सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक आरोपी वहां से भाग गए।
ग्रामीणों की मदद से रामसजीवन को जिला अस्पताल गौरीगंज पहुंचाया गया। हालत नाजुक होने पर चिकित्सकों ने उन्हें लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया, जहां बृहस्पतिवार को उनकी मौत हो गई। शुक्रवार को फूलपती की तहरीर पर जगन्नाथ गुप्ता और उसके दोनों बेटों सचिन व सतीश के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई का भरोसा मिलने पर परिजनों ने देर शाम अंतिम संस्कार किया गया। क्षेत्राधिकारी अमेठी मनोज कुमार मिश्र ने बताया कि दो आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
पहले मां, अब पिता का छूटा साथ
चार वर्षीय मासूम शिवांश के सिर से पहले मां और अब पिता का साया उठ गया। इसी वर्ष मार्च में मृतक की पत्नी निर्मला की मौत हो गई थी। पत्नी के निधन के बाद रामसजीवन बेटे के साथ छप्परनुमा मकान में रह रहे थे। 15 दिन पहले उन्होंने बेटे को उसकी ननिहाल भेज दिया था। अब पिता की मौत के बाद बच्चा बेसहारा हो गया है।
भूमि दान देने के बाद बढ़ा विवाद
परिजनों के अनुसार मृतक चार भाइयों में तीसरे नंबर पर थे। पिता राजाराम ने अपनी भूमि दान पत्र के माध्यम से छोटे बेटे के दोनों पुत्रों के नाम कर दी थी। जानकारी मिलने पर रामसजीवन ने विरोध किया था। करीब 15 दिन पहले इसी बात पर विवाद हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों का शांति भंग की आशंका में चालान किया था। इसके बाद भी तनाव बना रहा।