जगदीशपुर। गोमती की तेज धार ने थौरी और भूलीनगर के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। आमघाट पुल के पश्चिम नदी के यू-आकार के मोड़ पर तेज बहाव खेतों के किनारों को लगातार काट रहा है। किसानों के अनुसार, अब तक 40 से 50 बीघा खेती योग्य जमीन नदी में समा चुकी है।
जलस्तर बढ़ने से कटान तेज हुआ है, जिससे बची जमीन पर भी खतरा मंडरा रहा है। खेती पर निर्भर परिवारों को खेत के साथ रोजी-रोटी छिनने की चिंता सता रही है। गोमती जिले के उत्तरी हिस्से से गुजरती है, जहां मुसाफिरखाना तहसील के कई गांव बाढ़ और कटान से प्रभावित होते हैं। सितंबर की शुरुआत में लगातार बारिश के बाद गोमती का जलस्तर बढ़ा था।
ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से कटान का दंश झेल रहे हैं। इस बार जलस्तर बढ़ने से कटान की रफ्तार बढ़ी है, जिससे बची खेती पर भी खतरा है। घिर्राऊ, राम लखन, बाबू राम, साहब प्रसाद, राम तीरथ, राम नारायण धोबी, सूरज लाल वर्मा, दल बहादुर, महादेव और राम पदारथ की कुल 40 बीघा जमीन नदी में समाई है। ग्रामीणों का दावा है कि इनके अलावा दर्जनों अन्य किसानों की जमीन भी कटान की भेंट चढ़ चुकी है।
वर्षों से बांध की मांग, जांच के निर्देश
ग्रामीण गोमती के इस हिस्से में वर्षों से बांध और कटानरोधी सुरक्षा कार्य कराने की मांग कर रहे हैं। स्थायी सुरक्षा कार्य न होने से यह समस्या हर साल बनी रहती है। किसानों ने कटान प्रभावित क्षेत्र का तत्काल निरीक्षण कराने और प्रभावी कटानरोधी कार्य शुरू करने की मांग की है। जिलाधिकारी संजय चौहान ने नदी के बढ़े जलस्तर और कटान की स्थिति की जांच कराने तथा आवश्यकतानुसार बचाव कार्य के निर्देश देने की बात कही है।
फैक्ट फाइल
खतरे का निशान: 84.730 मीटर
जलस्तर: 81.670 मीटर
खतरे के निशान से अंतर 3.60 मीटर कम
24 घंटे में : 3:4 मिमी बारिश
इन मानसून में 361.5 मिमी