अमेठी। जिले में पिछले पांच दिनों में लंपी स्किन डिजीज के 18 संदिग्ध मवेशी मिले हैं। इन मवेशियों को आइसोलेट कर सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। जिले की सीमाओं पर निगरानी बढ़ा दी गई है। वहीं, संदिग्ध क्षेत्र के आस-पास मवेशियों का वैक्सीनेशन किया जा रहा है। इसके लिए चिकित्सकों की टीम लगाई गई है।
पिछले पांच दिनों से जिले में लंपी वायरस के संदिग्ध मवेशियों के मिलने का सिलसिला शुरू हुआ। शनिवार तक संदिग्ध 18 मवेशी लंपी स्किन डिजीज के पाए गए हैं। पशु विभाग की टीम लगातार पशुओं में लंपी रोग के लक्षण पता लगाने में जुटी हुई है। पशु पालकों को जागरूक भी किया जा रहा है। विभाग की ओर से सभी 28 अस्पतालों के स्टाफ को निगरानी के लिए लगाया गया है।
जिले में लंपी स्किन डिजीज से बचाव के लिए 45 हजार वैक्सीन मिली थी। जिसमें से अब तक 18500 वैक्सीन लगा दी गई हैं। शेष बची वैक्सीन लगाई जा रही है। इसके साथ 25 हजार वैक्सीन की और मांग की गई है।
लंपी स्किन डिजीज के लक्षण
- लंपी वायरस से संक्रमित पशु को हल्का बुखार आता है।
मुंह से लार अधिक निकलती है जो आंख-नाक से पानी बहता है।
- संक्रमित पशु के दूध उत्पादन में गिरावट आ जाती है।
- गर्भित पशु में गर्भपात का खतरा रहता है और कभी कभी पशु की मौत भी हो जाती है।
- पशु के शरीर पर त्वचा में बड़ी संख्या में दो से पांच सेमी की गांठे बन जाती हैं। -
संक्रमित मवेशी के पैर में सूजन आ जाती है।
लंपी स्किन डिजीज से बचाव
अगर पशु संक्रमित है तो उसे स्वस्थ पशुओं के झुंड से अलग रखें।
पशुओं के रहने वाले बाड़े की साफ सफाई रखें।
जिस क्षेत्र में लंपी वायरस का संक्रमण फैला है उस क्षेत्र में पशुओं की आवाजाही रोकी जानी चाहिए।
स्वस्थ पशुओं का टीकाकरण कराना चाहिए। जिससे अगली बार उन्हें किसी तरह का संक्रमण न हो।
जांच के लिए भेजे सैंपल
सीवीओ जेपी सिंह ने बताया कि लंपी स्किन डिजीज के पांच दिनों में संदिग्ध 18 मामले सामने आए हैं। जिन्हें आइसोलेट कर प्राथमिक उपचार किया जा रहा है। इन मवेशियों का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया है। जिले से सटी सीमाओं जैसे प्रतापगढ़, सुलतानपुर, अयोध्या, बाराबंकी, रायबरेली आदि से आने वाले मवेशियों पर नजर रखी जा रही है। सीमा से सटे गांवों के मवेशियों का टीकाकरण किया जा रहा है।