अंबेडकरनगर। समाज सेवा के क्षेत्र में लगातार काम कर रहे युवाओं ने जिले के अन्य युवाओं से युवा दिवस पर समाज के लिए काम करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। कहीं रक्तदान के जरिए तो कहीं भूखों का पेट भरने से लेकर लावारिस शवों के अंतिम संस्कार तक में बढ़-चढ़कर भूमिका निभाने वाले युवाओं ने युवा दिवस की पूर्व संध्या पर अमर उजाला से कहा कि राष्ट्र निर्माण की बड़ी जिम्मेदारी वाकई युवाओं के ऊपर है। युवाओं से आह्वान किया कि वे धर्म व जाति के भेदभाव में न पड़ते हुए सकारात्मक कार्यों के जरिए जरूरतमंदों की मदद तय करें। साथ ही समाज व राष्ट्र की प्रगति में सभी जरूरी योगदान करें। ऐसा करने पर ही हम सशक्त राष्ट्र के तौर पर सामने आ सकते हैं।
स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी को प्रत्येक वर्ष युवा दिवस के तौर पर मनाई जाती है। स्वामी विवेकानंद को युवाओं का आदर्श माना जाता है। युवा दिवस के दिन यूं तो देेश के तमाम हिस्सों में विविध आयोजन होते रहते हैं, लेकिन इन आयोजनों से ज्यादा बड़ी जरूरत इस बात की है कि युवा वर्ग ज्यादा सचेत होकर अपनी जिम्मेदारी महसूस कर सके। अमर उजाला टीम ने जिले में अपने कार्यों के जरिए समाज सेवा व जागरूकता की नई अलख जगाने वाले युवाओं से विस्तार से बात की। युवा दिवस के ठीक पहले इन युवाओं ने कहा कि जिले के सभी युवाओं को सकारात्मक सोच दिखाने की जरूरत है।
भूखों को भोजन कराने से लेकर घायलों व जरूरतमंदों की मदद समेत रक्तदान के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रहे सामाजिक संस्था पंख उड़ान एक उम्मीद के अध्यक्ष अंशु बग्गा ने कहा कि युवाओं के बूते ही समाज को खुशहाली प्रदान की जा सकती है। हम सब ऊपर वाले के आशीर्वाद और प्रेरणा से ही वह सब कुछ कर पा रहे, जो अधिकतम संभव हो पाता है। आज युवा अपना अधिकार तो मांगता है, लेकिन जिम्मेदारी का निर्वहन उतनी मजबूती से नहीं करता। हम सभी युवाओं को चाहिए कि दूसरों की तरफ देखने की बजाय युवा दिवस के मौके पर संकल्प लें कि हम प्रतिदिन कोई न कोई सकारात्मक कार्य अवश्य करेंगे।
कमजोर व असहाय वर्गों को भोजन उपलब्ध कराने से लेकर उनके हक की लड़ाई लगातार लड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अनिल मिश्र कहते हैं कि युवाओं में क्रांति लाने की ताकत है। जिले में तमाम युवा अच्छा काम कर भी रहे हैं। हालांकि इसमें और बढ़ोत्तरी की जरूरत है। सभी युवाओं को यह संकल्प लेना होगा कि हमें अपने कार्यों एवं व्यवहार से समाज का भला करना है और अपने घर-परिवार व क्षेत्र का मान बढ़ाना है। युवाओं को और ज्यादा संवेदनशील व जिम्मेदार होने का संकल्प लेने की जरूरत है।
लावारिस शव के अंतिम संस्कार तथा गरीब परिवार के बच्चों की पढ़ाई में बढ़-चढ़कर भूमिका निभाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता बरकत अली ने कहा कि प्रत्येक दुखी पीड़ित व्यक्ति की मदद करना हम सभी का धर्म होना चाहिए। हमें जाति व धर्म के चक्कर में पड़े बगैर वास्तविक पीड़ितों की मदद सुनिश्चित करनी है। इसमें अपार आत्मिक सुख की प्राप्ति होती है। जब हम कुछ अच्छा करते हैं तो दूसरों को भी ऐसा करने की प्रेरणा मिलती है।
युवान संस्था व युवक मंगल दल ब्राहिमपुर कुसुमा के अध्यक्ष प्रवीण गुप्त कहते हैं कि दूसरों की जान बचाने में युवाओं को और जिम्मेदारी से आगे आना है। वर्षों से लगातार स्वयं रक्तदान करते आ रहे प्रवीण ने कहा कि रक्तदान को लेकर युवाओं के बीच अभी भी तमाम भ्रांतियां हैं। यह उचित नहीं है। युवाओं को इन भ्रांतियों को दूर कर नियमित रक्तदान करना चाहिए। इसके साथ कहीं भी किसी जरूरतमंद की मदद करने की स्थिति दिखाई पड़े तो उससे पीछे न हटने का संकल्प प्रत्येक युवा को युवा दिवस पर लेना है।