अंबेडकरनगर।करबला के शहीदों का सिर्फ मातम करने से ही कुछ नहीं होने वाला, करबला के मिशन को समझना होगा। इमाम हुसैन के बताए आदर्शों पर चलना होगा। एक दूसरे की मदद करने का जज्बा अपने अंदर पैदा करना होगा। इसके साथ ही सच्चाई के साथ हमेशा खड़ा होना होगा। यह बातें सोमवार देर शाम मौलाना अकबर अली वॉयज ने कहीं। वे अकबरपुर नगर के मीरानपुर स्थित इमामबाड़ा हुसैनिया में मजलिस को संबोधित कर रहे थे।
मोलाना अकबर अली ने कहा कि करबला में सत्य और असत्य के बीच जंग हुई। इमाम हुसैन ने इस्लाम को बचाने के लिए करबला में अपने 72 साथियों के साथ शहादत दी। यदि इमाम हुसैन उस समय के बादशाह के आगे झुक गए होते और सच्चाई का साथ न दिया होता तो आज इस्लाम हो न होता, इंसानियत समाप्त हो जाती। इस्लाम को बचाने के लिए इमाम हुसैन ने जहां 18 वर्ष के बेटे हजरत अली अकबर की शहादत दी तो वहीं छह माह के अली असगर को भी इस्लाम पर कुर्बान कर दिया। मौलाना अकबर ने कहा कि हम सभी की जिम्मेदारी है कि इमाम हुसैन के बताए आदर्शों पर चलते हुए समाज व देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें। बाद में उन्होंने करबला के शहीदों पर प्रकाश डालकर माहौल को भावुक बना दिया। मजलिस बाद अंजुमन अकबरिया रजिस्टर्ड के सदस्यों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की।