आलापुर। बीती 27 मई से शुरू हो चुका ज्येष्ठ मास 24 जून तक रहेगा। शुभ फल प्राप्ति के लिए गेहूं के आटे की ब्रह्माजी की मूर्ति बनाकर जो व्यक्ति षोडशोपचार विधि से उनका श्रद्धा भाव से पूजन करता है, उसे सूर्य लोक में निवास का फल प्राप्त होता है। सनातन वैदिक आश्रम देव भूमि नयागांव के आचार्य आशुतोष शुक्ला ने बताया कि वामन पुराण में वर्णन आया है कि जो व्यक्ति ज्येष्ठ मास में जल से भरा कुम्भ अर्थात जल से भरा हुआ घड़ा, चंदन व पंखा आदि का दान करता है उस पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा बनी रहती है।
साथ ही भगवान वामन अति प्रसन्न होकर उसके समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। उन्होंने बताया कि इसी महीने में हनुमान जी की मुलाकात भगवान श्रीराम से पहली बार हुई थी। इसीलिए यह माह हनुमानजी को विशेष प्रिय है।
यही कारण है कि इस माह में पड़ने वाले मंगलवार का व्रत हनुमान जी का दर्शन एवं पूजन विशेष रूप से लाभप्रद है। जिसका ज्येष्ठ पुत्र जीवित हो उसे इस महीने में बैगन का सेवन नहीं करना चाहिए। जो व्यक्ति इस माह में एक समय भोजन करता है, वह कभी धनहीन नहीं होता है। शिव पुराण में आया है जो व्यक्ति इस महीने में काले तिल का दान करता है, वह अकाल मृत्यु की बाधा से छूट जाता है एवं भगवान शिव की अखंड भक्ति सहज ही मिलती है।