अंबेडकरनगर। मतों की गिनती के साथ ही आज यह तय हो जाएगा कि बेटी के बाद अब सांसद लालजी वर्मा की पत्नी को उपचुनाव में उतारने का निर्णय कैसा रहा। सपा पर परिवारवाद का आरोप लगाकर एक तरफ जहां भाजपा पूरे चुनाव हमलावर रही, वहीं पार्टी के भीतर भी सांसद को विरोध का सामना करना पड़ा।
कटेहरी के विधायक पद से सांसद लालजी वर्मा ने जब त्याग पत्र दिया था तभी सीट पर उनके परिवार से ही किसी के चुनाव लड़ने की चर्चा शुरू हो गई थी। शुरुआती दौर में सांसद पुत्री छाया वर्मा का नाम सामने आया। इसका कुछ पार्टी नेताओं ने विरोध शुरू कर दिया। बाद में सांसद की पत्नी पूर्व जिलापंचायत अध्यक्ष शोभावती वर्मा को टिकट दिया गया। उनका भी विरोध हुआ। लेकिन सपा ने इस बार अपना फैसला नहीं बदला।
अब परिणाम का समय है। लोगों की दिलचस्पी यह जानने में है कि कटेहरी की जनता ने परिवार के ही सदस्य को चुनाव मैदान में उतरने के निर्णय का कितना समर्थन किया है। वर्ष 2019 के जलालपुर विधानसभा उपचुनाव में तब बसपा में रहे पूर्व मंत्री लालजी वर्मा ने पुत्री छाया को टिकट दिलाया था। यह सीट रितेश पांडेय के सांसद चुने जाने पर खाली हुई थी। छाया को सपा के सुभाष राय के हाथों 776 मतों के मामूली अंतर से पराजित होना पड़ा। अब कटेहरी उपचुनाव की बारी है। अंतर बस इतना है कि इस बार लालजी वर्मा ने अपनी पत्नी को मैदान में उतारा है। ऐसे में यह देखना अहम रहेगा कि उपचुनाव में शोभावती बेटी की राह चलती हैं या फिर एक नई राह तैयार करती हैं।