इस दौरान कई केंद्रों पर ताले लटके मिले जब कि किसी किसी बूथ पर समय पर बीएलओ ही नहीं पहुंचे। कहीं तो पहुंचे ही नहीं। जिन केंद्रोंपर बीएलओ थे भी वहां जरूरी फार्मों की भारी कमी रही।
जिनके पास एक दो फार्म थे, उन्होंने फोटो कापी कराकर काम चलाया। नतीजजन इन केंद्रों पर नाम बढ़वाने व कटवाने पहुंचे ज्यादातर लोगों के हाथ मायूसी ही लगी।
अभियान के दौरान अपने केंद्रों पर पहुंचे बीएलओ का कहना था कि ने यहां तक कहा कि इससे अच्छा था कि वे सभी डोर टू डोर जाकर यह कार्य करते, तो इससे बेहतर ही होता।
दरअसल शासन के निर्देश पर औपचारिकता निभाने के लिए मतदाता मेले का आयोजन तो कर दिया गया, लेकिन उसका व्यापक प्रचार प्रसार नहीं कराया गया। बीएलओ को विशेष प्रशिक्षण तो दिया गया, लेकिन उन्हें आवश्यक कागजात मुहैया नहीं कराए गए।
इसी का नतीजा रहा कि इस मेले का समुचित लाभ लोगों को नहीं मिल सका। रविवार को अमर उजाला टीम ने जब विभिन्न परिषदीय विद्यालयों में लगे मतदाता मेले का जायजा लिया, तो वहां बड़े पैमाने पर लापरवाही दिखाई दी।