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बंधा न होने का खामियाजा भुगतेंगे ग्रामीण

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राजेसुल्तानपुर (अंबेडकरनगर)। जिले के अंतिम छोर पर आजमगढ़ की सीमा से सटे सरयू नदी के तटीय इलाके में बसे देवारा गांववासियों को इस वर्ष भी बाढ़ की विभीषिका झेलनी होगी। कारण यह कि ग्रामीणों की मांग के बावजूद प्रशासन व बाढ़ प्रखंड ने सरयू नदी के किनारे बंधा बनाने या फिर अन्य कोई जरूरी प्रबंध करने की जरूरत अब तक महसूस नहीं की है। ऐसे में बरसात का मौसम शुरू होने के साथ ही देवारा क्षेत्र के लोगोें को बाढ़ का खतरा सताने लगा है।
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बाढ़ की विभीषिका का दंश झेलना देवारा क्षेत्र के ग्रामीणों की नियति बन गई है। ग्रामीण दशकों से बाढ़ से निजात दिलाने के लिए स्थायी निदान की मांग कर रहे हैं, लेकिन जनप्रतिनिधि व अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। लगभग 10 हजार की आबादी वाला यह क्षेत्र मुख्यालय से 60 किलोमीटर दूर है।
देवारा क्षेत्र पूर्वांचल के प्रसिद्ध संत ब्रह्मचारी जी महाराज की तपोस्थली इंदौरपुर घिनहापुर से शुरू होता है। इसमें कमालपुर गांव का भी कुछ हिस्सा आता है। देवारा क्षेत्र में बना बंधा ही इसे दो हिस्सों में बांटता है। उत्तरी तरफ माझा कम्हरिया व आराजी देवारा के आधा दर्जन से अधिक पुरवे हैं। इस क्षेत्र में प्रत्येक वर्ष बाढ़ का पानी तबाही मचाता है। दक्षिण तरफ बरोही पांडेय का पूरा, साबितपुर सहित अन्य गांव स्थित है।
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इस क्षेत्र में बंधे की वजह से बाढ़ का प्रभाव आबादी क्षेत्र में कम रहता है, लेकिन फसलों को चपत लगती है। स्थानीय सतीराम, विजयी, रामचंद्र व फूदल आदि का कहना है कि यदि कम्हरिया घाट से सराय हंकार होते हुए आराजी देवारा व माझा कम्हरिया क्षेत्र में बंधा बनाकर बोल्डर लगाया गया होता तो बाढ़ से राहत मिल सकती थी। हालांकि इस बार भी प्रशासन ने इस क्षेत्र की आबादी को बाढ़ से बचाने के लिए कोई प्रबंध नहीं किया। उधर, एसडीएम रोशनी यादव का कहना है कि जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। कर्मचारियों को निगरानी पर लगाया है।
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