अंबेडकरनगर के इधना में अधूरा पड़ा मॉडल स्कूल।
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अंबेडकरनगर। छह वर्ष का लंबा समय गुजरने के बावजूद कार्यदायी संस्थाओं की लापरवाही के चलते इधना व रामनगर मॉडल स्कूल का निर्माण कार्य अब तक नहीं पूर्ण हो सका है। दोनों विद्यालयों में जुलाई माह से शिक्षण कार्य प्रारंभ किए जाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन कार्यदायी संस्थाओं की लापरवाही के चलते ऐसा नहीं हो सका। नतीजा यह है कि मॉडल स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने की उम्मीद लगाए छात्र-छात्राओं को तगड़ा झटका लगा है। मामले को गंभीरता से लेते हुए अब डीआईओएस ने कार्यदायी संस्थाओं के विरुद्ध कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा है।
ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा ग्रहण करने के लिए इधर-उधर की भागदौड़ न करनी पड़े, इसके लिए वर्ष 2012-13 में रामनगर व इधना में मॉडल स्कूल निर्माण को हरी झंडी शासन ने प्रदान की थी। दो करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले प्रत्येक स्कूल का निर्माण कार्य वर्ष 20015-16 में पूर्ण कर लिए जाने का निर्देश कार्यदायी संस्था को दिया गया। इधना मॉडल स्कूल के निर्माण की जिम्मेदारी सी एण्ड डीएस, जबकि रामनगर मॉडल स्कूल के निर्माण की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था पैक्सफेड को दी गई। निर्माण कार्य समय पर पूर्ण हो, इसके लिए संबंधित कार्यदायी संस्था को शत-प्रतिशत भुगतान भी कर दिया गया।
शुरुआत से ही निर्माण कार्य में कार्यदायी संस्थाओं की लापरवाही उजागर होने लगी। कभी निर्माण की गति धीमी होने की शिकायत सामने आती, तो मानक की अनदेखी किए जाने की। लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक मात्र 80 प्रतिशत निर्माण कार्य ही हो सका है। बीते दिनों इसे गंभीरता से लेते हुए शिक्षा निदेशक ने डीआईओएस के माध्यम से कार्यदायी संस्थाओं को पत्र भेजकर निर्देशित किया गया था कि जून माह में निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जाए, जिससे जुलाई माह में दोनों विद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रारंभ हो सके। स्कूलों के निर्माण कार्य बंद होने से मॉडल विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने की उम्मीद लगाए संबंधित क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को तगड़ा झटका लगा है।
बीते दिनों राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक इंद्रजीत यादव ने मॉडल स्कूल रामनगर का जायजा लिया, तो वहां चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा नजर आया। मुख्य गेट न होने के चलते छुट्टा पशुओं ने उसे अपना शरणस्थल बना लिया था। विद्यालय के एक कक्ष में कुछ सामान रखा हुआ था। ग्रामीणों ने बताया कि कोटेदार द्वारा इसमें सामान रखा गया है।
डीआईओएस विनोद सिंह ने बताया कि जून माह में ही दोनों विद्यालयों का निर्माण कार्य पूर्ण करने के लिए कार्यदायी संस्थाओं को पत्र भेजा गया था, लेकिन कार्य पूर्ण नहीं हो सका। ऐसे में अब दोनों संस्थाओं के विरुद्ध कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।