अंबेडकरनगर। तापमान बढ़ने के साथ ही जर्जर व ओवरलोड ट्रांसफार्मरों के जलने का सिलसिला तेज हो गया है। मार्च तक जहां पांच सप्ताह में 228 ट्रांसफार्मर जले थे, वहीं अप्रैल में महज तीन सप्ताह में ही 205 ट्रांसफार्मर जल गए। नतीजा यह कि संबंधित क्षेत्र में बिजली आपूर्ति से हजारों उपभोक्ता अलग-अलग समय में वंचित होते रहे। शहरी क्षेत्रों में तो फिर भी गनीमत रही, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर बदलवाने के लिए उपभोक्ताओं को अभी भी जेब गर्म करनी पड़ रही है। ट्रैक्टर-ट्रॉली से लेकर अन्य व्यवस्था करने वाले उपभोक्ताओं को ही प्राथमिकता पर ट्रांसफार्मर मिल पाना एक कड़वी सच्चाई बनी हुई है।
गर्मी बढ़ने के साथ ही ट्रांसफार्मरों के जवाब देने का क्रम तेज हो गया है। इसमें कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर सबसे ज्यादा शामिल हैं। दरअसल कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर ही बड़ी संख्या में शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में लगे हुए हैं। ऐसे ज्यादातर ट्रांसफार्मर ओवरलोड हैं। उपभोक्ताओं की तरफ से इन ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने की मांग की जाती है, लेकिन क्षमता बढ़ाने की तरफ ध्यान आमतौर पर नहीं दिया जा रहा है।
अकबरपुर नगर में रेल पटरी के बगल स्थित राबीबहाउद्दीनपुर में विद्युत आपूर्ति के लिए लगा 63 केवी का ट्रांसफार्मर ओवरलोड होने के चलते आए दिन जल जाता है। आजिज उपभोक्ता लगातार ट्रांसफार्मर क्षमता वृद्धि की मांग कर रहे हैं, लेकिन न तो क्षमता बढ़ाई जा रही और न ही ढंग से केबल लगाई जा रही, जिससे बिजली की चोरी रुक सके। इन्हीं सब मनमानी के चलते अन्य क्षेत्रों में भी ट्रांसफार्मर जब तब जलते रहते हैं। अब गर्मी बढ़ी है तो यह सिलसिला और गति पकड़ गया है।
23 फरवरी से 31 मार्च तक पांच सप्ताह में अलग-अलग क्षमता के कुल 228 ट्रांसफार्मर जले थे। इसमें सबसे ज्यादा 81 ट्रांसफार्मर 25 केवी के, जबकि 59 ट्रांसफार्मर 10 केवी, तो 32 ट्रांसफार्मर 16 केवी के शामिल थे। अप्रैल में विभाग ने 22 तारीख तक का जो आंकड़ा उपलब्ध कराया है, उसके अनुसार तीन सप्ताह में ही 205 ट्रांसफार्मर जल गए। इसमें सबसे ज्यादा 78 ट्रांसफार्मर 25 केवी, 49 ट्रांसफार्मर 10 केवी, जबकि 27 ट्रांसफार्मर 63 केवी के शामिल थे। इसके अलावा 16 केवी के 14, 100 केवी के 20, 250 केवी के 6 व 400 केवी के 11 ट्रांसफार्मर जल गए।